लोकसभा में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बताया कि 2016 से 2025 के बीच चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के दफ्तर को मौजूदा जजों के खिलाफ 8639 शिकायतें मिली हैं। इनमें 2024 में सबसे अधिक 1170 शिकायतें दर्ज हुईं। सरकार ने स्पष्ट किया कि ऐसी शिकायतों पर न्यायपालिका का इन-हाउस मैकेनिज्म लागू होता है।
नई दिल्ली में 14 फरवरी 2026 को लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने न्यायपालिका से जुड़ी शिकायतों के आंकड़े पेश किए। उन्होंने कहा कि 2016 से 2025 तक की अवधि में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के मौजूदा जजों के खिलाफ कुल 8639 शिकायतें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के कार्यालय को प्राप्त हुईं।
इसमें वर्ष 2024 सबसे अधिक प्रभावित रहा, जब 1170 शिकायतें दर्ज की गईं। मंत्री ने बताया कि इन शिकायतों की जांच और कार्रवाई न्यायपालिका के आंतरिक तंत्र, यानी इन-हाउस मैकेनिज्म के तहत की जाती है। सरकार इन मामलों में सीधे हस्तक्षेप नहीं करती।
मेघवाल ने मई 1997 के सुप्रीम कोर्ट के दो महत्वपूर्ण प्रस्तावों का उल्लेख किया। पहला, ज्यूडिशियल लाइफ के मूल्यों का पुनर्वक्तव्य (Restatement of Values of Judicial Life), जिसमें जजों के लिए आचरण के मानक निर्धारित किए गए। दूसरा, इन-हाउस प्रक्रिया, जो उन जजों के विरुद्ध कदम उठाने का प्रावधान करती है जो इन मानकों का उल्लंघन करते हैं।
प्रक्रिया के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के जजों और हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के खिलाफ शिकायतें सीधे CJI को भेजी जाती हैं। अन्य हाई कोर्ट जजों की शिकायतें संबंधित हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस द्वारा देखी जाती हैं। साथ ही, CPGRAMS (सेंट्रलाइज्ड पब्लिक ग्रीवेंस रिड्रेस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम) या अन्य माध्यमों से प्राप्त शिकायतें भी इन प्राधिकारियों को अग्रेषित कर दी जाती हैं।
यह खुलासा न्यायिक जवाबदेही पर चर्चा को बढ़ावा दे सकता है, हालांकि सरकार ने जोर दिया कि प्रक्रिया पूरी तरह न्यायपालिका के दायरे में रहती है।