आरबीआई ने बैंकों को चेतावनी दी है कि यदि तीसरे पक्ष के उत्पादों की गलत बिक्री साबित हो जाती है, तो ग्राहकों को रिफंड करना होगा। पिछले कुछ वर्षों में, ग्राहकों को बीमा, म्यूचुअल फंड या अन्य तीसरे पक्ष के उत्पादों को पूरी समझ के बिना खरीदने के लिए प्रेरित करने की चिंताएं उठी हैं। आरबीआई ने 2026 के ड्राफ्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं।
आरबीआई ने हाल ही में बैंकों को गलत बिक्री के मामलों में ग्राहकों को रिफंड करने की सख्त चेतावनी जारी की है। यह चेतावनी तीसरे पक्ष के उत्पादों जैसे बीमा, यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (ULIP) और म्यूचुअल फंड्स की बिक्री से संबंधित है। पिछले कुछ वर्षों में, ग्राहकों को इन उत्पादों को पूरी जानकारी के बिना खरीदने के लिए प्रेरित करने की शिकायतें बढ़ी हैं।
ड्राफ्ट दिशानिर्देश 2026 में बैंकों के लिए जिम्मेदार व्यवसाय आचरण दिशानिर्देशों को शामिल करते हैं। इनमें बैंक स्टाफ को प्रोत्साहन पर प्रतिबंध, बैंकिंग ऐप्स में डार्क पैटर्न्स का उपयोग रोकना, वित्तीय उत्पादों का बंडलिंग, और डायरेक्ट सेलिंग एजेंट्स के मानदंड शामिल हैं। ग्राहक सहमति अनिवार्य होगी। आरबीआई ने ड्राफ्ट मानदंडों पर फीडबैक के लिए 4 मार्च 2026 तक की समयसीमा निर्धारित की है।
यह कदम बैंकिंग विनियमन भारत 2026 के तहत बैंकों द्वारा बीमा और म्यूचुअल फंड वितरण को नियंत्रित करने का प्रयास है। स्रोतों के अनुसार, यदि गलत बिक्री साबित होती है, तो बैंकों को ग्राहकों को रिफंड देना होगा।