अहमदाबाद में बुधवार को आयोजित बहु-राज्यीय हितधारक परामर्श में लैंसेट आयोग की रिपोर्ट की सिफारिशों पर चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने भारत के स्वास्थ्य तंत्र में असमान देखभाल, खंडित वितरण और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में कमियों पर चिंता जताई।
अहमदाबाद में स्व-रोजगार महिला संघ (SEWA) की स्वास्थ्य पहल लोक स्वस्थ्य SEWA द्वारा भारतीय स्वरोजगार महिला अकादमी (IASEW) में आयोजित इस परामर्श में गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश से प्रतिभागी शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य देश में एकीकृत स्वास्थ्य प्रणाली विकसित करना था जो वर्तमान चिंताओं का समाधान करे। SEWA की सामाजिक सुरक्षा निदेशक और लैंसेट पैनल की आयुक्त मिराई चटर्जी ने कहा कि भारत का स्वास्थ्य तंत्र 'असमान गुणवत्ता वाली देखभाल, खंडित वितरण और खराब शासन' का सामना कर रहा है। उन्होंने प्राथमिक स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में स्पष्ट कमियों और स्थानीय परामर्शदाताओं की कमी की ओर इशारा किया। चटर्जी ने कहा, “हमारी रिपोर्ट में जो बात उभरकर सामने आती है वह यह है कि यह नागरिकों की जरूरतों और आकांक्षाओं से शुरू होती है—न कि प्रणाली से। लेकिन हम मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में प्राथमिक स्तर पर स्पष्ट कमियां देख रहे हैं और स्थानीय परामर्शदाताओं की कमी है।” आयोग के सह-अध्यक्ष और हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के प्रोफेसर विक्रम पटेल ने जोर दिया कि सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित और प्रदान की जाने वाली एकीकृत स्वास्थ्य वितरण प्रणाली सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज हासिल करने के लिए केंद्रीय रहेगी। उन्होंने कहा, “उच्च प्रदर्शन वाली, सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित और सार्वजनिक रूप से प्रदान की जाने वाली, एकीकृत स्वास्थ्य वितरण प्रणाली” सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है। परामर्श में नागरिक-केंद्रित सुधारों पर जोर दिया गया।