अजमेर का वायरल मिनी स्विट्जरलैंड मार्बल कचरा है, फेफड़ों की बीमारी से जुड़ा

राजस्थान के अजमेर में वायरल 'स्नो यार्ड' पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है, जो मिनी स्विट्जरलैंड जैसा दिखता है। लेकिन यह मार्बल स्लरी से बना कचरा है। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यह सफेद परिदृश्य क्रिस्टलाइन सिलिका धूल के संपर्क में ला सकता है, जो सिलिकोसिस और कैंसर से जुड़ी है।

अजमेर, राजस्थान में एक वायरल साइट पर्यटकों को खींच रही है, जिसे 'मिनी स्विट्जरलैंड' या 'स्नो यार्ड' कहा जा रहा है। यह सफेद दृश्य बर्फ जैसा लगता है, लेकिन वास्तव में यह मार्बल स्लरी से बना कचरा है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, यह मार्बल उद्योग का अपशिष्ट है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस साइट पर क्रिस्टलाइन सिलिका धूल का खतरा है, जो सिलिकोसिस और कैंसर जैसी फेफड़ों की बीमारियों से जुड़ी हुई है। राजस्थान के मार्बल उद्योग में स्लरी डंपिंग आम है, जो प्रदूषण का कारण बनती है। पर्यटकों को इस स्वास्थ्य जोखिम के प्रति सावधान रहने की सलाह दी जा रही है। कीवर्ड्स में अजमेर मार्बल स्लरी साइट, क्रिस्टलाइन सिलिका स्वास्थ्य जोखिम, राजस्थान मार्बल उद्योग प्रदूषण आदि का उल्लेख है। यह घटना 17 मार्च 2026 को रिपोर्ट की गई।

संबंधित लेख

For over a decade, northern Johannesburg's Kya Sands area has been plagued by toxic smoke from illegal dumping sites turned into burning wastelands. Organized crime syndicates operate these sites, unloading vast amounts of waste daily and igniting nightly fires that release hazardous pollutants. An estimated 150,000 residents suffer health risks from the polluted air, amid failed regulatory responses.

AI द्वारा रिपोर्ट किया गया

सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वतमाला की नई परिभाषा को स्वीकार कर लिया है, जो ऊंचाई 100 मीटर या अधिक वाले भू-आकृतियों को ही शामिल करती है। यह निर्णय वन सर्वेक्षण ऑफ इंडिया के आकलन के अनुसार लगभग 90 प्रतिशत पहाड़ियों को सुरक्षा से बाहर कर देता है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इससे पर्यावरणीय क्षति बढ़ सकती है।

अरावली पहाड़ियों की 100 मीटर ऊंचाई वाली परिभाषा पर विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है और 29 दिसंबर को सुनवाई तय की है। यह परिभाषा खनन और निर्माण के लिए 90% से अधिक क्षेत्र खोल सकती है, जिससे पर्यावरण को खतरा है। केंद्रीय सशक्त समिति ने चेतावनी दी थी कि यह पहाड़ियों की पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचाएगा।

AI द्वारा रिपोर्ट किया गया

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण और कोहरे ने हालात बिगाड़ दिए हैं। अधिकांश इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स 350 से ऊपर पहुंच गया है और वेंटिलेशन इंडेक्स 800 तक गिर चुका है, जो स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा है। डॉक्टरों ने चेतावनी जारी की है कि इससे सांस की बीमारियां बढ़ सकती हैं।

 

 

 

यह वेबसाइट कुकीज़ का उपयोग करती है

हम अपनी साइट को बेहतर बनाने के लिए विश्लेषण के लिए कुकीज़ का उपयोग करते हैं। अधिक जानकारी के लिए हमारी गोपनीयता नीति पढ़ें।
अस्वीकार करें