देश में एलपीजी गैस की कमी के बीच बिहार के गया जिले के बतसपुर गांव के ग्रामीण गोबर गैस प्लांट का उपयोग कर आत्मनिर्भर बने हुए हैं। यहां करीब 40-50 घरों में पाइपलाइन से गैस पहुंचाई जाती है, जिससे संकट का कोई प्रभाव नहीं पड़ा। यह लोहिया स्वच्छ अभियान और गोबरधन योजना के तहत स्थापित प्लांट ग्रामीणों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है।
देश के कई हिस्सों में एलपीजी गैस की कमी से लोग परेशान हैं, जहां सिलेंडर के लिए लंबी कतारें लग रही हैं। लेकिन बिहार के गया जिले के बोधगया प्रखंड में स्थित बतसपुर गांव इस संकट से अछूता है। यहां पिछले कई वर्षों से गोबर गैस प्लांट के माध्यम से घरों में खाना पकाया जा रहा है।
इस प्लांट को लोहिया स्वच्छ अभियान और गोबरधन योजना के तहत लगाया गया है। गांव के लगभग 40-50 घर पाइपलाइन से जुड़े हैं, जहां गोबर गैस सीधे पहुंचती है। प्रत्येक घर के बाहर मीटर लगा होता है, जो गैस उपयोग को मापता है। ग्रामीण गोबर देकर गैस मुफ्त प्राप्त करते हैं, जबकि अन्य 25 रुपये प्रति यूनिट का भुगतान करते हैं। गैस उत्पादन के बाद बचा अवशेष जैविक खाद के रूप में खेतों में उपयोग होता है।
गांव की ललिता देवी ने बताया, "पहले घरों के बाहर गाय का गोबर इकट्ठा हो जाता था, जिससे गंदगी फैलती थी। अब उसी गोबर से गैस बनती है और बचा हिस्सा खाद के काम आता है।" चंचला कुमारी ने कहा, "इस गैस से खाना बनाना आसान है, आंच तेज होती है और 30 मिनट में भोजन तैयार हो जाता है, जो लकड़ी के चूल्हे जैसा स्वाद देता है।"
गांव के मुखिया ईश्वर मांझी के अनुसार, पिछले चार वर्षों से करीब 50 घरों को गैस सप्लाई हो रही है। इससे महिलाएं धुएं से मुक्त हुई हैं और गांव स्वच्छ रहता है। यह मॉडल अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के लिए आत्मनिर्भरता का उदाहरण प्रस्तुत करता है।