कोलकाता में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हालिया हार ने भारत की टर्निंग पिचों पर स्पिन के खिलाफ कमजोरियों को उजागर किया है। गंभीर युग में, पिछले 12 महीनों में विदेशी स्पिनरों ने भारतीय बल्लेबाजों को घरेलू मैदान पर काबू करने का कोड क्रैक कर लिया लगता है। यह एक बड़ा बदलाव दर्शाता है।
भारत की कोलकाता में हालिया हार ने एक बार फिर स्पिन के खिलाफ उनकी कमजोरियों को उजागर किया है, खासकर खतरनाक टर्निंग ट्रैक्स पर। पिछले 12 महीनों में, भारत में खेलने वाले विदेशी स्पिनरों के प्रति शक्ति संतुलन में बड़ा बदलाव आया है, जिन्होंने भारतीय बल्लेबाजों को उनके घरेलू मैदान पर काबू करने का तरीका ढूंढ लिया लगता है।
यह ट्रेंड गौतम गंभीर के कोचिंग युग से जुड़ा है, जहां शुभमन गिल जैसे बल्लेबाजों को चुनौतियां मिल रही हैं। कीवर्ड्स से संकेत मिलता है कि साइमन हार्मर, मिशेल सैंटनर और अजाज पटेल जैसे स्पिनरों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत का स्पिन के खिलाफ रिकॉर्ड और घरेलू सीरीज हार, विशेष रूप से IND vs SA में, भारतीय टेस्ट क्रिकेट में बदलते गतिशीलता को रेखांकित करता है। भारतीय स्पिनरों बनाम विदेशी स्पिनरों की तुलना अब अधिक संतुलित हो गई है।