8 अप्रैल 2026 को भारतीय सरकार ने पाकिस्तान द्वारा मध्यस्थता वाले अमेरिका-ईरान युद्धविराम समझौते का स्वागत किया। विदेश मंत्रालय ने संघर्ष के शीघ्र अंत की अपील की और हार्मुज जलडमरूमध्य में निर्बाध व्यापार प्रवाह की मांग की। बयान में संघर्षग्रस्त पक्षों का नाम न लेने और पाकिस्तान को धन्यवाद न देने जैसे सावधानीपूर्ण शब्दों का उपयोग किया गया।
विदेश मंत्रालय (MEA) ने बुधवार को जारी बयान में अमेरिका-ईरान युद्धविराम का स्वागत किया, जो पाकिस्तान की मध्यस्थता से समय सीमा के निकट हासिल हुआ।
MEA ने संघर्ष के शीघ्र अंत और हार्मुज जलडमरूमध्य में 'निर्बाध' व्यापार प्रवाह की मांग की। बयान में संघर्षग्रस्त पक्षों—जैसे अमेरिका, ईरान या अन्य—का नाम सीधे नहीं लिया गया।
अन्य देशों के विदेश मंत्रालयों के विपरीत, भारतीय MEA ने पाकिस्तान को मध्यस्थता और आगामी वार्ता के लिए मेजबानी की पेशकश के लिए धन्यवाद नहीं दिया। यह कदम पश्चिम एशिया संकट के संदर्भ में देखा जा रहा है, जहां ईरान-इजरायल युद्ध का भी उल्लेख है।
MEA ने संवाद और कूटनीति पर जोर दिया, जबकि कीवर्ड्स में पाकिस्तान की भूमिका और हार्मुज नेविगेशन प्रमुख हैं।