इसरो 12 जनवरी 2026 को प्सलवी-सी62 मिशन के माध्यम से 16 उपग्रह लॉन्च करने जा रहा है। मुख्य पेलोड डीआरडीओ का 400 किलोग्राम का हाइपरस्पेक्ट्रल अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट ईओएस-एन1 (कोडनेम अन्वेषा) है, जो रणनीतिक निगरानी के लिए विकसित किया गया है। मिशन में भारत का पहला ऑर्बिटल एआई लैबोरेटरी और $2 प्रति मिनट स्पेस साइबरकैफे जैसी नवीनताएं शामिल हैं।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अपनी 2026 की अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत उच्च दांव वाले प्सलवी-सी62 मिशन से कर रहा है। यह लॉन्च 12 जनवरी 2026 को श्रीहरिकोटा से निर्धारित है। मिशन में कुल 16 उपग्रह शामिल हैं, जिनमें डीआरडीओ द्वारा विकसित मुख्य पेलोड ईओएस-एन1 (अन्वेषा) प्रमुख है। यह 400 किलोग्राम का हाइपरस्पेक्ट्रल सैटेलाइट रणनीतिक निगरानी के उद्देश्य से बनाया गया है।
इस मिशन की खासियतें कई पहली हैं। इसमें भारत का पहला ऑर्बिटल एआई इमेज लैब शामिल है, जो अंतरिक्ष में कृत्रिम बुद्धिमत्ता अनुसंधान को बढ़ावा देगा। इसके अलावा, एक क्रांतिकारी स्पेस साइबरकैफे लॉन्च हो रहा है, जो $2 (लगभग 180 रुपये) प्रति मिनट की दर से सेवाएं प्रदान करेगा। 'पेट्रोल पंप इन स्पेस' के रूप में जाना जाने वाला आयुलसैट रिफ्यूलिंग सिस्टम अंतरिक्ष ईंधन भरने की सुविधा देगा। एमआईआरए टेलीस्कोप, जो सबसे हल्का टेलीस्कोप है, भी मिशन का हिस्सा है।
कई स्टार्टअप्स और कंपनियां इसमें योगदान दे रही हैं, जैसे ऑर्बिटएड, ईओन स्पेस लैब्स, और टेकमे2स्पेस। रोनक सामंत्राय जैसे विशेषज्ञों ने इस 'खगोलीय बैले' को सराहा है। यह मिशन भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को मजबूत करेगा, विशेष रूप से एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग और सैटेलाइट सर्विसेज में। लाइव स्ट्रीमिंग के माध्यम से दुनिया भर के दर्शक इस घटना को देख सकेंगे।