नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने 31 मई 2026 को संसद में कहा कि नेपाल ने भी कुछ जगहों पर भारतीय क्षेत्र पर कब्जा किया है। इस बयान से संसद में हंगामा मच गया, जिसके बाद विदेश मंत्रालय ने स्पष्टीकरण जारी किया।
बालेंद्र शाह ने कालापानी क्षेत्र पर एक सवाल का जवाब देते हुए यह बात कही। विपक्षी सांसदों ने बयान को संसदीय रिकॉर्ड से हटाने की मांग की।
विदेश मंत्रालय ने बाद में स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री की टिप्पणी नो-मैन्स लैंड और सीमा पार कब्जे से संबंधित थी। मंत्रालय ने कहा कि नदी सीमा वाले क्षेत्रों में ऐसी स्थितियां पैदा होती हैं जहां एक देश के लोग दूसरे देश की जमीन का इस्तेमाल करते हैं।
मंत्रालय ने 1816 की सुगौली संधि का जिक्र करते हुए कहा कि लिम्पियाधुरा, लिपुलेख, कालापानी और सुस्ता क्षेत्रों का सीमांकन अभी बाकी है। दोनों देश कूटनीतिक बातचीत से मुद्दे सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।