दशकों की राजनीतिक हिचकिचाहट के बाद, पाकिस्तान के प्रशासनिक पुनर्गठन का लंबे समय से चली आ रही बहस फिर से सामने आ गई है। पाकिस्तानी मंत्री अब्दुल अलीम खान ने कहा है कि छोटे प्रांतों का गठन अब अपरिहार्य है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रस्ताव अधिक नुकसान पहुंचा सकता है।
पाकिस्तान में प्रशासनिक संरचना को फिर से संगठित करने का प्रस्ताव दशकों से चर्चा में है, लेकिन राजनीतिक अनिश्चितता के कारण इसे टाल दिया जाता रहा है। अब यह मुद्दा फिर से उभर आया है। विकास और योजना मंत्री अब्दुल अलीम खान ने हाल ही में कहा कि देश को छोटे प्रांतों में विभाजित करना आवश्यक हो गया है, ताकि बेहतर शासन सुनिश्चित हो सके।
खान के अनुसार, वर्तमान प्रांतों की संख्या चार है, लेकिन नए प्रांत बनाकर स्थानीय मुद्दों का बेहतर समाधान हो सकता है। हालांकि, विशेषज्ञ इस विचार के खिलाफ हैं। उनका मानना है कि यह कदम शासन संबंधी समस्याओं को और बढ़ा सकता है, जैसे कि संसाधनों का असमान वितरण और जातीय तनाव। एक विशेषज्ञ ने कहा, 'यह प्रस्ताव अच्छे शासन से अधिक नुकसान पहुंचा सकता है।'
पाकिस्तान के इतिहास में प्रांतों का विभाजन संवेदनशील रहा है, खासकर 1970 के दशक में बांग्लादेश के अलगाव के बाद। वर्तमान प्रस्ताव में संभावित नए प्रांतों के नाम और सीमाएं स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन यह राजनीतिक बहस को गर्माने की संभावना है।