पश्चिम बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी को स्कूल जॉब्स घोटाले में जमानत मिलने के बाद जेल से रिहा किया गया। उन्होंने अपनी पार्टी टीएमसी से निलंबन पर टिप्पणी की और अर्पिता मुखर्जी के साथ अपने रिश्ते को दोस्ती बताया। चटर्जी ने कहा कि उनकी वफादारी ही उनके पतन का कारण बनी।
स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने 10 नवंबर 2025 को पार्थ चटर्जी को जमानत दी, और वह 11 नवंबर को जेल से बाहर आए। लगभग तीन साल तीन महीने की कैद के बाद रिहा हुए चटर्जी ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा, 'मेरी वफादारी ही मेरे लिए सजा बन गई।' उन्होंने खुद को टीएमसी का सिपाही बताया, भले ही पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया हो। चटर्जी ने कहा, 'सब कहते हैं मैं पार्टी से सस्पेंड हूं, लेकिन मुझे कोई लेटर नहीं मिला। पार्टी मेरे साथ न हो, मैं पार्टी के साथ हूं। टीएमसी मेरी पार्टी है।'
ममता बनर्जी को अपना नेता बताते हुए उन्होंने कहा, 'मैंने जिंदगी भर ममता दीदी का अनुसरण किया। जब पार्टी संकट में थी, तब दीदी बाहर लड़ती थीं, मैं अंदर।' उन्होंने अभिषेक बनर्जी को टीएमसी का भविष्य बताया। बेहाला वेस्ट के विधायक रहे चटर्जी ने कहा, 'पहले स्वास्थ्य ठीक करूंगा, फिर बेहाला वेस्ट के लोगों से मिलूंगा।'
अर्पिता मुखर्जी से रिश्तों पर चटर्जी ने बेबाकी से कहा, 'हां, अर्पिता मेरी दोस्त है। इसमें गलत क्या? मेरी पत्नी सालों पहले गुजर गईं, क्या दोस्त नहीं रख सकता? अगर किसी पुरुष की दो बीवियां हो सकती हैं तो मेरी एक दोस्त क्यों नहीं हो सकती?' जांच में अर्पिता के फ्लैट से 50 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए थे, लेकिन चटर्जी ने कहा, 'वो पैसा मेरा नहीं था।'
उन्होंने अपनी गिरफ्तारी (23 जुलाई 2022 को ईडी द्वारा) पर भावुक होकर कहा, 'मेरी वफादारी ही मेरे पतन का कारण बनी।' चटर्जी ने खुद की तुलना भीष्म पितामह से की और कहा कि विश्वासघात हुआ है। शिक्षा मंत्री के कार्यकाल का बचाव करते हुए उन्होंने दावा किया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व में 51 विश्वविद्यालय और 8,000 स्कूल बने, तथा छात्र उपस्थिति, स्कॉलरशिप और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार हुआ। एसएससी भर्ती घोटाले में ट्रायल जारी है, अगली सुनवाई इस महीने के अंत में।