नागपुर में एक अनोखा शतरंज टूर्नामेंट ने 12 से 80 वर्ष की आयु के दृष्टिसंपन्न और दृष्टिबाधित खिलाड़ियों को एक साथ लाया। आशादीप अपंग महिला बाल विकास संस्था और नागपुर शतरंज संघ द्वारा कल्पित इस आयोजन में पांच-पांच खिलाड़ियों वाली पांच टीमें थीं। इसका उद्देश्य समावेशी प्रतियोगिता के माध्यम से दृष्टिबाधितों के लिए सामाजिक समर्थन को बढ़ावा देना था।
टूर्नामेंट का उद्घाटन मुख्य अतिथि सीए सदानंद हजारे द्वारा किया गया, जिसमें फ्रीमेसन्स लॉज से अम्लेश पुरोहित, आशादीप संस्था अध्यक्ष डॉ. प्रतिमा शास्त्री, और CAN कार्यकारी अध्यक्ष एसएस सोमन उपस्थित थे। डॉ. प्रतिमा शास्त्री ने “साथी हाथ बढ़ाना” पहल पर प्रकाश डाला, जो दृष्टिबाधितों को सामाजिक समर्थन प्रदान करती है। उन्होंने इस वर्ष प्रतियोगिता की भारी सफलता पर इशारा किया, जिसमें 12 से 80 वर्ष के प्रतिभागी शामिल थे। पांच टीमों में 25 दृष्टिबाधित और 25 दृष्टिसंपन्न खिलाड़ियों को शामिल कर आयोजित इस आयोजन ने सभी क्षमताओं के बीच भागीदारी को प्रोत्साहित किया। प्रमुख दृष्टिबाधित खिलाड़ियों में कमलेश मानवटकर, तिजन गवार, सुनील दुबे और ज्ञानिराम गोखले शामिल थे। दृष्टिसंपन्न प्रतिभागियों में 79 वर्षीय अंतरराष्ट्रीय आर्बिटर टी.एन. बहादुरे के साथ ही दिग्गज सदानंद महाजन, उमेश गजभिये, प्रमोद रामटेके, प्रभाकर पाटील, संजय भांगे और दिलीप चेप्टे थे। परिणामों में दृष्टिबाधित वर्ग में तिजन गवार ने जीत हासिल की, जबकि कमलेश मानवटकर दूसरे स्थान पर रहे। दृष्टिसंपन्न खिलाड़ियों में सदानंद महाजन की टीम पहले स्थान पर रही, उसके बाद दिलीप चेप्टे की टीम। सभी पांच बोर्डों पर सर्वश्रेष्ठ दृष्टिसंपन्न खिलाड़ी महाजन ग्रुप से थे, जबकि चार शीर्ष दृष्टिबाधित स्थान तिजन गवार ग्रुप से और एक कमलेश मानवटकर के ग्रुप से थे। व्यक्तिगत पुरस्कार सबसे युवा दृष्टिबाधित महिला खिलाड़ी सिमरन गिरडकर और बाल दृष्टिबाधित खिलाड़ी शिवम ठाकुर को दिए गए। सांत्वना पुरस्कार राज कारगोले और महानंदा तालवेकर को प्रदान किए गए। पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि मेसोनिक लॉज से डॉ. तेजिंदर सिंह रावल उपस्थित हुए। दृष्टिबाधित शिक्षा अधिकारी सुजीत शिंदे ने अपने अनुभवों पर आधारित प्रेरणादायक भाषण दिया। मौके पर डॉ. प्रतिमा शास्त्री, अम्लेश पुरोहित और आशादीप संस्था मार्गदर्शक श्री लालासाहेब पाटील की मौजूदगी रही।