बेंगलुरु की रहने वाली विप्रा बेंगलुरु सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं क्योंकि उनका सरनेम शहर के नाम पर है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया जिसमें बताया कि उनके दादाजी ने सरनेम न देकर भेदभाव से बचाने की कोशिश की थी। बाद में कानूनी जरूरत पर शहर का नाम ही सरनेम बना।
बेंगलुरु की विप्रा बेंगलुरु इन दिनों सोशल मीडिया पर खासी चर्चा में हैं। उनका सरनेम किसी जाति या पारिवारिक परंपरा से जुड़ा नहीं है, बल्कि सीधे शहर 'बेंगलुरु' से लिया गया है। विप्रा ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें उन्होंने अपने अनोखे सरनेम की कहानी साझा की। वीडियो में वे बचपन की तस्वीरें और बेंगलुरु से जुड़ी यादें दिखाती हैं।
विप्रा के अनुसार, उनके दादाजी नहीं चाहते थे कि उनके बच्चे सरनेम के आधार पर आंके जाएं। वे मानते थे कि लोग अक्सर नाम, बैकग्राउंड और सामाजिक हैसियत से किसी को जज करते हैं। इसलिए उन्होंने अपने बच्चों को कोई सरनेम नहीं दिया, ताकि वे भेदभाव से बच सकें। बाद में, जब विप्रा का जन्म हुआ और सरकारी व कानूनी दस्तावेजों के लिए सरनेम जरूरी हो गया, तो परिवार ने बेंगलुरु में जन्म होने की वजह से शहर का नाम ही अपना लिया। यह फैसला सोच-समझकर लिया गया था, जो किसी जाति या हैसियत से न जुड़ा हो।
यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। यूजर्स ने विप्रा के दादाजी की सोच की खूब तारीफ की। एक यूजर ने लिखा, "आपके दादाजी अपने समय से बहुत आगे थे।" वहीं दूसरे ने कहा, "पूरा शहर ही आपका सरनेम हो, इससे खास क्या हो सकता है।" विप्रा की कहानी लोगों को सोचने पर मजबूर कर रही है कि पहचान नाम से नहीं, बल्कि मूल्यों और सोच से बनती है। यह घटना 26 जनवरी 2026 को रिपोर्ट की गई।