आदिवासी

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देश में माओवादी उग्रवाद समाप्त होने के साथ छत्तीसगढ़ से विस्थापित हजारों आदिवासियों का तेलुगु राज्यो में भविष्य अनिश्चित है। वे 15-20 वर्षों से जंगलों में बसकर पोडू खेती कर रहे हैं, लेकिन अब वन भूमि पुनर्प्राप्ति प्रयासों का सामना कर रहे हैं। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने वापसी या रहने के विकल्प सुझाए हैं।

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