पिछले दो वर्षों में टी20 क्रिकेट में भारतीय टीम ने लगातार जीत हासिल कीं और लगभग हर सात में से छह मैच जीते। इस दबदबे को मजबूत करते हुए टीम इंडिया ने 2026 टी20 वर्ल्ड कप जीता, जो इस फॉर्मेट में उनकी श्रेष्ठता का प्रमाण है। आंकड़े दिखाते हैं कि 2024 के बाद 50 टी20 मैचों में 41 जीत मिलीं।
टी20 क्रिकेट को अनिश्चितताओं का खेल माना जाता है, लेकिन पिछले दो वर्षों में भारतीय टीम ने इस धारणा को चुनौती दी। 29 जून 2024 को पिछले टी20 वर्ल्ड कप का फाइनल जीतने के बाद से अब तक खेले गए 50 टी20 इंटरनेशनल मैचों में भारत ने 39 मुकाबले जीते, 2 मैच टाई रहे जिन्हें सुपर ओवर में जीता गया, यानी कुल 41 जीत। इस दौरान 7 हार और 2 बेनतीजा मैच हुए, जबकि सर्वोच्च स्कोर 297 रन रहा।
टूर्नामेंट से पहले चुनौतियां रहीं, जैसे कप्तान और उपकप्तान के रन बनाने में संघर्ष, हर्षित राणा की चोट, और बाएं हाथ के बल्लेबाजों को ऑफ स्पिन के खिलाफ परेशानी। टीम प्रबंधन ने संयम दिखाया और बदलाव किए: शुभमन गिल की जगह संजू सैमसन को शामिल किया गया, ईशान किशन को फॉर्म के आधार पर मौका मिला, और टॉप ऑर्डर में तीन बाएं हाथ के बल्लेबाजों की रणनीति बदली।
टीम की ताकत इसकी गहराई में है, जहां यशस्वी जायसवाल, श्रेयस अय्यर जैसे खिलाड़ी बेंच पर उपलब्ध हैं। जसप्रीत बुमराह, हार्दिक पंड्या, अक्षर पटेल जैसे स्टार्स का योगदान महत्वपूर्ण रहा। नॉकआउट स्टेज में भारत ने सेमीफाइनल और फाइनल में टॉस हारने के बावजूद पहले बल्लेबाजी कर 250 से ज्यादा रन बनाए और जीते। दक्षिण अफ्रीका से हार के बाद रणनीति में समायोजन किया गया, जहां आक्रामकता के साथ दक्षता पर जोर दिया।
शिवम दुबे ने हर तरह की गेंदबाजी का सामना किया, अक्षर पटेल गेंदबाजी में प्रभावी बने, संजू सैमसन ने अनुभव का उपयोग किया, अभिषेक शर्मा ने आक्रामकता बरकरार रखी, तिलक वर्मा ने नई भूमिका अपनाई, हार्दिक पंड्या ने तीसरे तेज गेंदबाज की कमी पूरी की, और बुमराह भरोसेमंद साबित हुए। गौतम गंभीर के कोचिंग और सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में यह सफलता मिली। यह उपलब्धि प्रतिभा, रणनीति और मानसिक मजबूती का परिणाम है।