दावोस में विशेषज्ञों ने भारत की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने पर चर्चा की

दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के एक सत्र में ग्लोबल विशेषज्ञों ने भारत की मजबूत विकास दर, सुधारों और चुनौतियों पर चर्चा की। इंडिया टुडे ग्रुप के सहयोग से आयोजित इस पैनल में गीता गोपीनाथ, सुनील मित्तल, अश्विनी वैष्णव और आईकिया के सीईओ ने भारत के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य पर विचार साझा किए। उन्होंने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, श्रम सुधारों और प्रदूषण जैसी बाधाओं पर जोर दिया।

21 जनवरी 2026 को दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के एक विशेष सत्र में, इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस-चेयरपर्सन कली पुरी ने पैनल का संचालन किया। इस चर्चा का केंद्र था कि क्या भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर गीता गोपीनाथ ने भारत की उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा, “डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण बेहद प्रभावशाली रहा है। जीएसटी में जो किया गया, खासकर हालिया सरलीकरण, वह अर्थव्यवस्था के लिए बेहद मददगार है।” उन्होंने मोमेंटम बनाए रखने के लिए प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने और 2047 के 'विकसित भारत' लक्ष्य पर जोर दिया। महंगाई कम सिंगल डिजिट में होने को सकारात्मक बताया, लेकिन जमीन अधिग्रहण, न्यायिक सुधारों और श्रम बाजार की चुनौतियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विकास में केवल 30% हिस्सा श्रम से आया है और बड़े पैमाने पर स्किलिंग जरूरी है। प्रदूषण को बड़ी बाधा बताते हुए, विश्व बैंक के आंकड़ों का हवाला दिया: “भारत में हर साल प्रदूषण के कारण लगभग 17 लाख लोग जान गंवाते हैं।”

भारती एंटरप्राइजेज के चेयरमैन सुनील मित्तल ने आशावादी दृष्टिकोण अपनाया। उन्होंने कहा, “भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेंगे ही। अगर आध्यात्मिक भाषा में कहूं तो यह किस्मत में लिखा है।” 25-30 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था तक पहुंचने, नीति स्थिरता और वैश्विक व्यापार समझौतों की आवश्यकता पर बल दिया। पुराने लाइसेंस राज को याद करते हुए, वर्तमान सुधारों की तारीफ की।

आईकिया के वैश्विक सीईओ जुवेन्सियो मेज़्टु हेरेरा ने भारत को बड़ा बाजार, युवा आबादी और लोकतंत्र बताया। उन्होंने कहा, “भारत कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था से सीधे अत्याधुनिक AI युग में छलांग लगा सकता है।” दीर्घकालिक निवेश की सलाह दी।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सुधारों का ब्योरा दिया: “पिछले दस वर्षों में 1,600 कानूनों को खत्म किया गया है। करीब 35 हजार अनुपालनों को हटाया गया है।” टेलीकॉम टावर अनुमति अब 7 दिनों में, रेलवे टर्मिनल 2.5 महीनों में। टैरिफ चुनौतियों के बावजूद निर्यात बढ़ने का उल्लेख किया, इलेक्ट्रॉनिक्स को तीसरा सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र बताया।

सत्र के अंत में कली पुरी ने कहा, “भारत दुनिया के लिए एक सकारात्मक ताकत है और इसका सुनहरा भविष्य पहले ही तय हो चुका है।” यह चर्चा भारत की आर्थिक यात्रा के अवसरों और चुनौतियों को रेखांकित करती है।

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