केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने शनिवार को घोषणा की कि गुजरात के कच्छ में दशक बाद ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (जीआईबी) का चूजा पैदा हुआ है। यह जंपस्टार्ट पद्धति के तहत पहली अंतरराज्यीय पहल है, जिसमें राजस्थान से अंडा 770 किलोमीटर लाकर स्थापित किया गया। चूजा 26 मार्च को सफलतापूर्वक फूटा और अब अपनी पालक मां के साथ प्राकृतिक आवास में पल रहा है।
गुजरात के कच्छ के घासभूमि में केवल तीन मादा जीआईबी बची होने के कारण वहां उपजाऊ अंडा प्राप्त करना असंभव था। इसलिए, राजस्थान के संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम से एक बंधी हुई जीआईबी का अंडा लिया गया, जो 22 मार्च को 19 घंटे की निरंतर सड़क यात्रा के बाद एक पोर्टेबल इनक्यूबेटर में ले जाया गया।
यह अंडा अगस्त 2025 में टैग की गई एक मादा जीआईबी के नेस्ट में रखा गया था, जिसने पहले बांझ अंडा दिया था। मादा ने अंडे को सफलतापूर्वक सेते हुए 26 मार्च को चूजे को जन्म दिया। क्षेत्रीय निगरानी टीम चूजे को प्राकृतिक आवास में पालक मां द्वारा पाले जाते देख रही है।
यह जंपस्टार्ट प्रयास पर्यावरण, वन तथा जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (मोईएफसीसी), राजस्थान एवं गुजरात के राज्य वन विभागों तथा वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा एक वर्ष पूर्व नियोजित किया गया था।
प्रोजेक्ट जीआईबी का उद्घाटन 2011 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन से हुआ और 2016 में औपचारिक रूप से शुरू किया गया। मंत्री ने बताया कि राजस्थान के साम एवं रामदेवरा संरक्षण केंद्रों में अब 73 पक्षी हैं, जिनमें इस प्रजनन मौसम में पांच नए चूजे जुड़े। भारत अब लंबी अवधि की संरक्षण योजना के तहत पक्षियों को जंगलीकरण की ओर बढ़ रहा है।
भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट में इसे गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजाति की वसूली में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और सभी वैज्ञानिकों, क्षेत्रीय अधिकारियों तथा वन्यजीव प्रेमियों को बधाई दी। उन्होंने चूजे के जीवित रहने की आशा जताई और संरक्षण प्रयासों में पूर्ण प्रतिबद्धता दोहराई।