अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध ने मिडिल ईस्ट के पर्यटन क्षेत्र को बुरी तरह प्रभावित किया है। दुबई, दोहा और अबू धाबी जैसे शहरों में होटल खाली पड़े हैं और विश्व यात्रा एवं पर्यटन परिषद (WTTC) के अनुसार क्षेत्र को प्रतिदिन कम से कम 60 करोड़ डॉलर का नुकसान हो रहा है। हवाई क्षेत्र बंद होने से उड़ानें रद्द हो रही हैं और यात्रा महंगी पड़ रही है।
अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध ने मिडिल ईस्ट के पर्यटन और यात्रा क्षेत्र को गहरा झटका दिया है। दुबई, दोहा और अबू धाबी जैसे प्रमुख ट्रांजिट हब्स, जहां पहले प्रतिदिन पांच लाख से अधिक यात्री आते-जाते थे, अब सन्नाटे में डूबे हैं। विश्व यात्रा एवं पर्यटन परिषद (WTTC) के आंकड़ों के मुताबिक, यात्रा मांग में गिरावट से इस क्षेत्र को हर दिन कम से कम 60 करोड़ डॉलर (600 मिलियन डॉलर) का नुकसान हो रहा है। मिडिल ईस्ट वैश्विक पर्यटकों का लगभग 5 प्रतिशत और ट्रांजिट यातायात का 14 प्रतिशत संभालता है। संयोगवश, संघर्ष के पहले दो दिनों में खाड़ी हवाई क्षेत्र में बाधाओं से 5,000 से अधिक उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। 2026 के पूर्वानुमान में क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पर्यटक 207 अरब डॉलर खर्च करने वाले थे, जिसमें 13 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद थी। लेकिन ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के अनुसार, यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो पर्यटकों में 27 प्रतिशत गिरावट आ सकती है, यानी 3.8 करोड़ कम पर्यटक और 56 अरब डॉलर का राजस्व नुकसान। हवाई क्षेत्र बंदी से उड़ानों को लंबे मार्ग अपनाने पड़ रहे हैं, जिससे ईंधन खपत और समय बढ़ गया है। एयर इंडिया ने ईंधन अधिभार लगाया है, जबकि यूरोपीय एयरलाइंसों ने किराया वृद्धि की चेतावनी दी है। भारत पर भी असर पड़ रहा है, क्योंकि यूरोप और उत्तरी अमेरिका के लिए मिडिल ईस्ट प्रमुख ट्रांजिट रूट है। सुरक्षा चिंताओं से बुकिंग रद्द हो रही हैं, भले ही कुछ जगहें युद्ध से सीधे प्रभावित न हों।