बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में सत्तारूढ़ एनडीए ने 202 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया, जबकि महागठबंधन 35 सीटों पर सिमट गया। नीतीश कुमार के नेतृत्व में बीजेपी ने 89 और जेडीयू ने 85 सीटें प्राप्त कीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे विकास और सुशासन की जीत बताया।
बिहार की 243 सीटों वाली विधानसभा में एनडीए ने 202 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की, जो 2010 के बाद सबसे बड़ी जीत है। बीजेपी को 89, जेडीयू को 85, एलजेपी (आरवी) को 4.97% वोट शेयर के साथ सीटें मिलीं, जबकि महागठबंधन में आरजेडी को 23% वोट शेयर से करीब 25 सीटें और कांग्रेस को दो अंकों से कम मिलीं। वोट शेयर में एनडीए का 46.52% रहा, महागठबंधन का 37.64%।
नीतीश कुमार ने कहा, 'लोगों ने हमारी सरकार पर भरोसा जताया है, इसके लिए आभार।' उन्होंने मोदी, चिराग पासवान, जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा को धन्यवाद दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'यह लोकतंत्र की जीत है, विकास और सामाजिक न्याय की जीत। बिहार ने जंगल राज को नकार दिया।' उन्होंने बंगाल चुनाव के लिए संदेश दिया, 'गंगा जी बिहार से बहते हुए ही बंगाल पहुंचती है... बिहार ने बंगाल में बीजेपी की जीत का रास्ता बना दिया।'
महागठबंधन की हार के कारणों में सीट शेयरिंग विवाद, तेजस्वी यादव को सीएम फेस बनाना, राहुल गांधी का कमजोर प्रचार और SIR मुद्दे का असर शामिल हैं। कांग्रेस में आंतरिक असंतोष उभरा, शशि थरूर ने 'गंभीर आत्मनिरीक्षण' की मांग की। एआईएमआईएम ने सीमांचल की 5 सीटें जीतीं, ओवैसी ने तेजस्वी पर तंज कसा, 'जो अपने बड़े भाई को नहीं मना सका, वो बिहार की जनता को कैसे जोड़ पाएगा।'
यादव परिवार के झगड़े ने आरजेडी को नुकसान पहुंचाया। दलित वोटर एनडीए की ओर गए, जहां महागठबंधन को 38 आरक्षित सीटों में से सिर्फ 4 मिलीं। प्रशांत किशोर की जन सुराज को कोई सीट नहीं मिली।