प्रेमानंद महाराज ने बताई शादी निभाने की सबसे जरूरी शर्त

प्रेमानंद महाराज ने अपने प्रवचन में जन्म कुंडली के महत्व पर चर्चा की, लेकिन जोर दिया कि विवाह की सफलता कुंडली मिलान से कहीं अधिक आपसी समझ पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि विचारों की समानता और धैर्य ही दांपत्य जीवन में शांति लाते हैं। आधुनिक समय में लव मैरिज और लिव-इन रिलेशनशिप में कुंडली को कम महत्व दिया जाता है, फिर भी शास्त्रीय दृष्टि से इसे बनवाना आवश्यक है।

नई दिल्ली में 22 नवंबर 2025 को दिए गए प्रवचन में प्रेमानंद महाराज ने जन्म कुंडली को ज्योतिष में व्यक्ति के स्वभाव, भविष्य, करियर और विवाह जैसे पहलुओं को समझने के लिए महत्वपूर्ण बताया। कुंडली जन्म तिथि, समय और स्थान के आधार पर ग्रहों की स्थिति से तैयार की जाती है, जो जीवन के फैसलों को प्रभावित करती है।

पारंपरिक विवाहों में कुंडली मिलान गुणों के आधार पर उपयोगी माना जाता है, लेकिन महाराज ने आधुनिक संदर्भ में लव मैरिज और लिव-इन रिलेशनशिप का जिक्र किया, जहां इसे कम तवज्जो दी जाती है। उन्होंने सलाह दी कि शास्त्रीय पद्धति के अनुसार कुंडली अवश्य बनवानी चाहिए।

प्रवचन के दौरान एक व्यक्ति ने पूछा कि कुंडली मिल जाने पर भी दांपत्य जीवन में झगड़े क्यों होते हैं? महाराज ने उत्तर दिया, "कुंडली मिलने से शांति नहीं मिलती, शांति तब मिलती है जब विचार और व्यवहार एक-दूसरे से मेल खाते हों।" उन्होंने धैर्य, समझ और सम्मान पर जोर दिया। अगर पत्नी कटु वचन बोले तो पति को शांत रहकर स्थिति संभालनी चाहिए, क्योंकि तकरार से समाधान नहीं निकलता।

महाराज के अनुसार, विवाह की सफलता कुंडली पर नहीं, बल्कि विचारों की समानता, गलतियों को स्वीकारने की क्षमता, सहयोग, संवाद और समझदारी से तय होती है। कुंडली मार्गदर्शन दे सकती है, लेकिन रिश्ते की मजबूती आपसी व्यवहार और सम्मान से बनती है।

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