भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला दिया है कि सभी गिरफ्तारियों के लिए पुलिस को लिखित रूप में गिरफ्तारी के आधार बताने होंगे, जो संवैधानिक अधिकारों को मजबूत करता है। इस निर्णय से ऐसी संचार के बिना गिरफ्तारियां अवैध हो जाएंगी। यह नए आपराधिक कानूनों के तहत सभी अपराधों पर लागू होगा।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 7 नवंबर 2025 को एक महत्वपूर्ण फैसले में निर्देश दिया है कि सभी अपराधों के लिए गिरफ्तारी के आधारों को लिखित रूप में आरोपी को सूचित करना अनिवार्य होगा। यह फैसला आपराधिक प्रक्रिया में एक बड़ा बदलाव लाता है और संविधान के अनुच्छेद 22 के तहत संरक्षण को मजबूत करता है, जो गिरफ्तारी के आधारों की जानकारी का अधिकार देता है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मौखिक सूचना पर्याप्त नहीं है और इसकी अनदेखी करने पर गिरफ्तारी तथा उसके बाद की रिमांड अवैध मानी जाएगी। यह निर्देश गिरफ्तारी प्रक्रियाओं में अनुशासन लाने और शक्ति के दुरुपयोग को रोकने का उद्देश्य रखता है।
यह निर्णय हाल के मामलों के संदर्भ में आया है, जैसे मुंबई बीएमडब्ल्यू हिट-एंड-रन केस में मिहिर शाह से जुड़े, जहां प्रक्रिया में चूक उजागर हुई। यह भारतीय न्याय संहिता 2023 के संक्रमण के साथ संरेखित है, जो भारतीय दंड संहिता की जगह ले रही है, लेकिन मौलिक अधिकारों को प्राथमिकता देता है।
कीवर्ड्स से संकेत मिलता है कि यह कानूनी अनुशासन और संवैधानिक अधिकारों पर जोर देता है।