अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल का एक साल पूरा हो गया है, जो 20 जनवरी 2025 को शुरू हुआ था। इस दौरान 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के तहत टैरिफ, सैन्य कार्रवाइयों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से अलगाव ने वैश्विक व्यवस्था को हिला दिया। भारत सहित कई देशों पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगने से आर्थिक प्रभाव पड़ा है।
20 जनवरी 2025 को दूसरी बार सत्ता संभालने के बाद ट्रंप ने 228 एक्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी किए, जिनमें गवर्नमेंट एफिशिएंसी डिपार्टमेंट (DOGE) की स्थापना शामिल है। उन्होंने 317,000 फेडरल वर्कर्स को बर्खास्त किया और DEI कार्यालयों को बंद कर दिया। आप्रवासन नीति में सख्ती बरतते हुए 600,000 लोगों को निर्वासित किया और 75 देशों पर वीजा प्रतिबंध लगाए।
विदेश नीति में ट्रंप ने कई विवादास्पद कदम उठाए। जनवरी 2026 में वेनेजुएला में सैन्य अभियान चलाया, जहां राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स को नार्को-टेररिज्म के आरोप में गिरफ्तार किया गया। ट्रंप ने कहा, "Last night and early today, at my direction, the United States armed forces conducted an extraordinary military operation in the capital of Venezuela." उन्होंने वेनेजुएला को तब तक चलाने का ऐलान किया जब तक सुरक्षित संक्रमण न हो। ईरान पर 2025 में बिना यूएन अनुमति के हमला किया, जो अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन माना गया।
आर्थिक मोर्चे पर अप्रैल 2025 में इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पॉवर्स एक्ट के तहत सभी देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाए, जबकि भारत पर 50 प्रतिशत तक। फरवरी 2025 में एक्स पर पोस्ट किया, "ट्रेड के मामले में, मैंने निष्पक्षता के लिए यह तय किया है कि मैं रेसिप्रोकल टैरिफ लगाऊंगा।" इससे वैश्विक व्यापार प्रभावित हुआ और अमेरिकी घरेलुओं के खर्च बढ़े। नवंबर 2025 में G-20 से दक्षिण अफ्रीका को बाहर किया। जनवरी 2026 में 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अलगाव, जिसमें WHO, पेरिस जलवायु समझौता और इंटरनेशनल सोलर अलायंस शामिल हैं। WHO से बाहर होने से उसका फंडिंग प्रभावित हुआ, जहां अमेरिका का योगदान 400-500 मिलियन डॉलर सालाना था।
ट्रंप ने गाजा में 'बोर्ड ऑफ पीस' गठित किया, खुद चेयरमैन बने और अन्य देशों से 1 अरब डॉलर फीस मांगी, जिसमें भारत को भी ऑफर दिया। ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी दी। 8 जनवरी 2026 के इंटरव्यू में कहा, 'मुझे किसी अंतर्राष्ट्रीय कानून की जरूरत नहीं है, मेरी शक्ति की सीमाएं केवल मेरी नैतिकता है।' इन कदमों से वैश्विक सहयोग कमजोर हुआ है, हालांकि आलोचक इसे अमेरिकी संप्रभुता का प्रदर्शन मानते हैं।