पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण सोमवार को भारतीय शेयर बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई। अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों से कच्चे तेल की कीमतें उछल गईं, जिससे निवेशकों में सतर्कता बढ़ गई। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया, जो वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है।
2 मार्च 2026 को पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति ने वैश्विक बाजारों को हिला दिया। अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों में तेहरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हो गई, जिससे अनिश्चितता बढ़ गई। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को नेविगेशन के लिए बंद कर दिया, जहां से वैश्विक तेल का लगभग 20 प्रतिशत और भारत के कच्चे तेल आयात का 40 प्रतिशत गुजरता है।
इसके परिणामस्वरूप, ब्रेंट कच्चा तेल सोमवार को 7 प्रतिशत से अधिक चढ़कर 82.40 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो 14 महीनों का उच्चतम स्तर है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि स्थिति बिगड़ती है तो कीमतें 100 डॉलर तक जा सकती हैं। भारत जैसे देशों के लिए यह चिंता का विषय है, क्योंकि कुल तेल आयात का 50 प्रतिशत इसी मार्ग से आता है।
भारतीय शेयर बाजारों पर इसका असर पड़ा। सुबह 9:15 बजे तक निफ्टी 50 में 2.06 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,659.25 पर और बीएसई सेंसेक्स में 3.38 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,543.73 पर कारोबार हो रहा था। यह निफ्टी के लिए 1 फरवरी के बाद और सेंसेक्स के लिए 7 अप्रैल 2025 के बाद की सबसे तेज गिरावट थी। सभी 16 प्रमुख क्षेत्रों में नुकसान हुआ, जिसमें छोटे और मध्यम कैप सूचकांक क्रमशः 3.8 प्रतिशत और 3.4 प्रतिशत गिरे। तेल विपणन, पेंट, टायर, विमानन और रासायनिक कंपनियों के शेयर सबसे अधिक प्रभावित हुए।
रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर पड़ा और सरकारी बॉन्ड यील्ड बढ़ गई। प्री-ओपन सेशन में गिफ्ट निफ्टी 166 अंक गिरा, जो निफ्टी के 150 अंकों से अधिक गिरने का संकेत देता है। शुक्रवार को भी बाजारों में गिरावट आई थी, जब सेंसेक्स 961 अंक और निफ्टी 317 अंक नीचे बंद हुए थे। निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर रुख कर रहे हैं।