अरावली
अरावली पहाड़ियों की 100 मीटर ऊंचाई वाली परिभाषा पर विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है और 29 दिसंबर को सुनवाई तय की है। यह परिभाषा खनन और निर्माण के लिए 90% से अधिक क्षेत्र खोल सकती है, जिससे पर्यावरण को खतरा है। केंद्रीय सशक्त समिति ने चेतावनी दी थी कि यह पहाड़ियों की पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचाएगा।
AI द्वारा रिपोर्ट किया गया
सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वतमाला की नई परिभाषा को स्वीकार कर लिया है, जो ऊंचाई 100 मीटर या अधिक वाले भू-आकृतियों को ही शामिल करती है। यह निर्णय वन सर्वेक्षण ऑफ इंडिया के आकलन के अनुसार लगभग 90 प्रतिशत पहाड़ियों को सुरक्षा से बाहर कर देता है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इससे पर्यावरणीय क्षति बढ़ सकती है।