एम्स दिल्ली में शुरू हुई हरीश राणा की इच्छामृत्यु प्रक्रिया

सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद एम्स दिल्ली में हरीश राणा की इच्छामृत्यु प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। डॉक्टरों की टीम लाइफ सपोर्ट सिस्टम को धीरे-धीरे हटाने की प्रक्रिया अपना रही है, जो करीब दो से तीन सप्ताह ले सकती है। विशेषज्ञ मरीज को किसी पीड़ा से बचाने पर ध्यान दे रहे हैं।

हरीश राणा की इच्छामृत्यु प्रक्रिया शुरू: एम्स दिल्ली में धीरे-धीरे हटेंगे लाइफ सपोर्ट सिस्टम हरीश राणा, जो 2013 में पंजाब यूनिवर्सिटी में बीटेक छात्र रहते हुए चौथी मंजिल की बालकनी से गिरने के कारण सिर की गंभीर चोट से 13 वर्षों से कोमा में हैं, के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 को इच्छामृत्यु की अनुमति दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह सक्रिय इच्छामृत्यु नहीं है, बल्कि कृत्रिम पोषण और जीवन रक्षक साधनों को धीरे-धीरे हटाकर प्राकृतिक मृत्यु की अनुमति है। हरीश को गाजियाबाद से लाकर AIIMS दिल्ली के डॉ. बी.आर. आंबेडकर इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर हॉस्पिटल के पैलिएटिव केयर यूनिट में भर्ती किया गया है। प्रक्रिया का नेतृत्व एनेस्थीसिया और पैलिएटिव मेडिसिन विभाग की प्रोफेसर डॉ. सीमा मिश्रा कर रही हैं। टीम में न्यूरोसर्जरी, ऑनको-एनेस्थीसिया, पैलिएटिव मेडिसिन और मनोचिकित्सा विशेषज्ञ शामिल हैं। डॉक्टरों के अनुसार, प्रक्रिया में पहले मरीज की स्थिति का आकलन किया जाता है, फिर कृत्रिम पोषण को कम किया जाता है और दर्द निवारक दवाएं व पैलिएटिव सेडेशन दिया जाता है। AIIMS से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, यह दो से तीन सप्ताह ले सकती है, जिसमें लगातार निगरानी होगी। पूर्व प्रमुख डॉ. सुषमा भटनागर ने कहा कि उद्देश्य मरीज को पीड़ा से बचाना है। हरीश के पिता अशोक राणा ने फैसले को कठिन बताया, लेकिन बेटे के हित में लिया। परिवार आध्यात्मिक सहयोग ले रहा है, जिसमें ब्रह्माकुमारी सिस्टर लवली शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने गरिमा के साथ प्रक्रिया के निर्देश दिए हैं।

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