केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा वामपंथी उग्रवाद उन्मूलन के लिए निर्धारित 31 मार्च 2026 की समय सीमा पर छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों ने दो वर्षों में 531 माओवादियों को मार गिराया और CPI (माओवादी) के शीर्ष नेतृत्व को तहस-नहस कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि बस्तर क्षेत्र अब नक्सल-मुक्त होने की कगार पर है।
2024 में अमित शाह ने देश से वामपंथी उग्रवाद मिटाने की समय सीमा 31 मार्च 2026 निर्धारित की थी। तब से छत्तीसगढ़ में तीव्र अभियानों में 531 माओवादी मारे गए, जबकि CPI (माओवादी) की पोलितब्यूरो और सेंट्रल कमेटी ने 24 सदस्य खोए—या तो मारे गए या आत्मसमर्पण किया।
नक्सलियों को बड़ा झटका 21 मई 2025 को लगा जब महासचिव नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू समेत 26 अन्य को अबुझमाड़ में मार गिराया गया। नवंबर 2025 में सेंट्रल कमेटी सदस्य मदवी हिड़मा की मौत हुई, जो 260 सुरक्षाकर्मियों और 81 नागरिकों की हत्याओं में आरोपी था। फरवरी 2026 में पोलितब्यूरो सदस्य थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवूजी ने आत्मसमर्पण किया।
सुरक्षा बलों ने नारायणपुर, बीजापुर और सुकमा में 103 नए पुलिस कैंप स्थापित किए, जो 8,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर करते हैं। बस्तर में 2024-2026 के बीच 500 माओवादी मारे गए, 42 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए और 119 नागरिक मारे गए।
नक्सल ऑपरेशंस के एडीजी विवेकानंद सिन्हा ने कहा, "उनका पूरा राजनीतिक ढांचा ढह गया है, सैन्य संरचना नष्ट हो चुकी है। अब कुछ कैडर सिविल कपड़ों में घूमते हैं और ज्यादा खतरा नहीं।" बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी ने कहा कि बस्तर नक्सल-मुक्त चरण के करीब है, लेकिन पूर्ण लक्ष्य तब हासिल होगा जब माओवादी हिंसा करने में असमर्थ हो जाएंगे।