असम में सुखोई Su-30MKI जेट क्रैश में शहीद हुए 28 वर्षीय फ्लाइट लेफ्टिनेंट पूर्वेश दुरगकर का पार्थिव शरीर नागपुर पहुंचा, जहां उनकी मां बिलख पड़ीं। परिवार और स्थानीय लोग शोक में डूब गए। उन्हें पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।
नागपुर की एक गली में शनिवार, 8 मार्च 2026 को सन्नाटा छा गया जब फ्लाइट लेफ्टिनेंट पूर्वेश दुरगकर का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा घर पहुंचा। 28 वर्षीय पूर्वेश भारतीय वायुसेना के पायलट थे, जिनकी मौत गुरुवार को असम के करबी आंगलोंग जिले में सुखोई Su-30MKI फाइटर जेट के क्रैश में हो गई। इस हादसे में स्क्वाड्रन लीडर अनुज की भी मौत हुई। विमान जोरहाट एयरबेस से उड़ा था और उड़ान भरने के कुछ ही मिनट बाद रडार से गायब हो गया।
पूर्वेश के पिता रविंद्र दुरगकर, जो रेलवे से रिटायर्ड हैं, ने बताया कि उन्होंने बेटे से आखिरी बार बुधवार को बात की थी, जब सब सामान्य लग रहा था। अगले दिन सुबह ग्रुप कैप्टन का फोन आया, जिसमें हादसे की खबर दी गई। पूर्वेश बचपन से ही आसमान छूने का सपना देखते थे और नागपुर में पढ़ाई के दौरान वायुसेना जॉइन करने का फैसला लिया। वे छत्रपति शिवाजी महाराज से प्रेरित थे और राष्ट्रभक्ति की भावना रखते थे। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में भी हिस्सा लिया था, जो पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर हमले का अभियान था।
कुछ दिन पहले पूर्वेश घर आए थे, जहां परिवार के साथ मिलन हुआ। उनकी बहन, जो आईआईटी से पढ़ी हैं और अमेरिका में बसी हैं, भी मौजूद थीं। शुक्रवार को पार्थिव शरीर दिल्ली लाया गया, जहां श्रद्धांजलि दी गई, फिर नागपुर के सोनगांव एयरफोर्स स्टेशन पहुंचा। घर पहुंचते ही मां ने कहा, 'मेरा बेटा अब इस दुनिया में नहीं...'। मां, बहन और पिता रोते रहे, जबकि वायुसेना अधिकारी और दोस्त भी भावुक हो गए।
अंतिम संस्कार नागपुर के मानेवाडा घाट पर हुआ, जहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ सलामी और गन सैल्यूट दिया गया। पिता ने मुखाग्नि दी। बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और 'पूर्वेश अमर रहें' तथा 'भारत माता की जय' के नारे लगाए। पूर्वेश अविवाहित थे और उनकी कहानी प्रेरणा देती रहेगी।