विशाखापत्तनम में शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में भारतीय नौसेना ने अपनी तीसरी परमाणु संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी आईएनएस अरिधामन को चुपचाप कमीशन कर लिया। यह अरिहंत वर्ग की पनडुब्बी भारत के परमाणु त्रयी को मजबूत करती है। सिंह ने सोशल मीडिया पर इसे 'शब्द नहीं शक्ति' बताया।
भारतीय नौसेना ने 3 अप्रैल को विशाखापत्तनम में आईएनएस अरिधामन (S4) को औपचारिक रूप से कमीशन किया, जो अरिहंत वर्ग की तीसरी एसएसबीएन है। यह गोपनीय समारोह रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुआ, जो एक ही दिन आईएनएस तारागिरी फ्रिगेट के कमीशनिंग के बाद आयोजित किया गया।
नौसेना के स्रोतों के अनुसार, अरिधामन ने व्यापक समुद्री परीक्षण पूरे कर लिए थे। सिंह ने एक्स पर पोस्ट किया, "शब्द नहीं शक्ति है, ‘अरिधामन’!" यह पनडुब्बी रणनीतिक बलों के अधीन है और भारत के परमाणु त्रयी का हिस्सा बनेगी, जिसमें भूमि, वायु और समुद्र से परमाणु हमले की क्षमता शामिल है।
अरिहंत (2016) और अरिघाट (अगस्त 2024) से बड़ी यह 7,000 टन वजन की पनडुब्बी 24 K-15 सागरिका मिसाइलें, 8 K-4 या K-5 मिसाइलें ले जा सकती है, जिनकी रेंज 3,500 किमी तक है। अमेरिका, रूस, चीन और फ्रांस की तरह भारत अब समुद्र से परमाणु हथियार पहुंचा सकता है। S4* (शायद अरिसुदन) परीक्षणाधीन है।
नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने दिसंबर में कहा था कि अरिधामन जल्द कमीशन होगी। यह उन्नत प्रौद्योगिकी वाहन (ATV) परियोजना का हिस्सा है, जिसे विशाखापत्तनम के शिप बिल्डिंग सेंटर ने बनाया। भारत का परमाणु सिद्धांत 'नो फर्स्ट यूज' पर आधारित है।