मिडिल ईस्ट संकट में फंसे भारतीयों को लाने के लिए सरकार की कोशिशें

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए कूटनीतिक और विमानन प्रयास तेज कर दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 48 घंटों में आठ देशों के नेताओं से बात की, जबकि विशेष उड़ानों का संचालन शुरू हो गया है। विदेश मंत्रालय ने नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है और आपातकालीन संपर्क विवरण जारी किए हैं।

नई दिल्ली, 4 मार्च 2026। मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष के कारण कई भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं। सरकार ने उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले 48 घंटों में गल्फ और पश्चिम एशिया के आठ देशों के नेताओं से बातचीत की। उन्होंने हाल की हिंसा की निंदा की, क्षेत्र में शांति और स्थिरता की आवश्यकता पर जोर दिया और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए धन्यवाद व्यक्त किया।

विमानन क्षेत्र में, स्पाइसजेट ने 3 मार्च को चार विशेष उड़ानें संचालित कीं, जो फुजेराह से दिल्ली, मुंबई और कोच्चि पहुंचीं। 4 मार्च को आठ और विशेष उड़ानें निर्धारित हैं: दिल्ली के लिए चार, मुंबई के लिए तीन और कोच्चि के लिए एक। इसी तरह, इंडिगो ने जेद्दाह से चार विशेष उड़ानें चलाईं, जो दिल्ली, मुंबई और कोच्चि पहुंचीं। सऊदी एयरलाइंस की उड़ान SV756 भी जेद्दाह से दिल्ली आई।

4 मार्च को भारतीय एयरलाइनों द्वारा कुल 58 उड़ानें संचालित होने की योजना है, जिसमें इंडिगो की 30 और एयर इंडिया तथा एयर इंडिया एक्सप्रेस की 23 उड़ानें शामिल हैं। संकट के कारण अब तक भारतीय एयरलाइनों ने 1,221 उड़ानें रद्द की हैं, जबकि विदेशी एयरलाइनों ने 388। पिछले तीन दिनों में कुल 1,117 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द हुई हैं।

विदेश मंत्रालय ने मिडिल ईस्ट के विभिन्न देशों में भारतीय दूतावासों के आपातकालीन संपर्क जारी किए हैं, जैसे यूएई के लिए +971 543090571 (व्हाट्सएप) और बहरीन के लिए +973 39418071। इसके अलावा, तीन टोल-फ्री नंबर उपलब्ध हैं: 1800118797, +91 11 2301 2113, +91 11 2301 4104 और +91 11 2301 7905, जो सुबह 9 से रात 9 बजे तक सक्रिय रहेंगे।

मंत्रालय ने यात्रियों को एयरलाइन वेबसाइटों से फ्लाइट स्टेटस जांचने, रिफंड और बदलाव के लिए सहायता लेने की सलाह दी है। भारतीय मिशन और सिविल एविएशन मंत्रालय एयरलाइनों तथा विदेशी अधिकारियों के संपर्क में हैं। दूतावासों ने अनावश्यक यात्रा से बचने और स्थानीय दिशानिर्देशों का पालन करने की सलाह दी है। मंत्रालय ने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और क्षेत्र में तनाव कम करने की आवश्यकता है।

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