पश्चिम एशिया में दो सप्ताह के युद्धविराम के बीच भारत ने ऊर्जा सुरक्षा प्रयास तेज कर दिए हैं। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी 9-10 अप्रैल को कतर जाएंगे, जबकि विदेश मंत्री एस जयशंकर 11-12 अप्रैल को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का दौरा करेंगे। ये यात्राएं तेल और गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा संघर्ष के प्रभाव का आकलन करने के उद्देश्य से हैं।
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच 28 फरवरी से चल रहे युद्ध के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम ने भारत को खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा प्रयास तेज करने का मौका दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायस्वाल ने गुरुवार को अंतर-मंत्रालयी संक्षिप्तीकरण में पुष्टि की, "हम पश्चिम एशिया के विकासों पर करीब से नजर रख रहे हैं। हम क्षेत्र के देशों के साथ जुड़ाव जारी रखेंगे।"
जायस्वाल ने कहा कि जयशंकर यूएई की यात्रा 11-12 अप्रैल को करेंगे, जहां वे नेतृत्व से मिलकर सहयोग की समीक्षा करेंगे। पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट किया कि पुरी 9-10 अप्रैल को कतर जाएंगे। कतर भारत का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस आपूर्तिकर्ता है, जबकि यूएई दूसरा सबसे बड़ा।
युद्ध से ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें 72.87 डॉलर प्रति बैरल से मार्च 9 तक 119.5 डॉलर (64% उछाल) पहुंच गईं, जो मंगलवार को 109.27 डॉलर पर बंद हुई। युद्धविराम की खबर से बुधवार को यह 94.75 डॉलर पर घटी, लेकिन गुरुवार को 98.06 डॉलर पर पहुंच गई। ईरान के मध्य मार्च में कतर के रास लफ्फान गैस सुविधाओं पर हमले ने स्थिति बिगाड़ दी।
ये यात्राएं ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति का आकलन करने और लंबी अवधि के अनुबंधों पर फोर्स मेज्योर के प्रभाव को कम करने में मदद करेंगी। कतर से भारत को 11.19 मिलियन मीट्रिक टन एलएनजी (6.39 अरब डॉलर) और 4.89 मिलियन मीट्रिक टन एलपीजी (3.21 अरब डॉलर) आयात होता है। जीसीसी भारत के 35% तेल और 70% गैस आयात का स्रोत है।