भारत ने पश्चिम एशिया की ऊर्जा अवसंरचना पर हमलों को रोकने की मांग की

भारत ने पश्चिम एशिया में ऊर्जा अवसंरचना पर हमलों को तत्काल रोकने की अपील की है, क्योंकि इससे देश की एलएनजी आपूर्ति प्रभावित हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस, मलेशिया, कतर, जॉर्डन और ओमान के नेताओं से बातचीत कर शांति बहाली और ऊर्जा पारगमन सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को पश्चिम एशिया में ऊर्जा अवसंरचना पर हमलों को रोकने की मांग की। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायस्वाल ने कहा कि ऐसे हमले अस्वीकार्य हैं और इन्हें बंद किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे पहले से अस्थिर ऊर्जा परिदृश्य और बिगड़ रहा है। उन्होंने कतर के रास लाफ्फान एलएनजी केंद्र पर ईरान के हमले का हवाला देते हुए कहा कि इससे भारत की गैस आपूर्ति प्रभावित हो रही है, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से। कतर भारत की वैश्विक एलएनजी आयात का 40% से अधिक प्रदान करता है। इससे पहले इजरायल ने ईरान के साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर हमला किया था, जिसके बाद ईरान ने कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की सुविधाओं को निशाना बनाया। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर कहा कि पश्चिम एशिया में ऊर्जा अवसंरचना पर हमले निंदनीय हैं और अनावश्यक वृद्धि का कारण बन सकते हैं। उन्होंने कतर के शेख तमीम बिन हमाद अल थानी, ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक, जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और मलेशिया के पीएम अनवर इब्राहिम से फोन पर बात की। सभी बातचीतों में तनाव कम करने, संवाद और कूटनीति पर जोर दिया गया, साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य से माल और ऊर्जा का निर्बाध पारगमन सुनिश्चित करने की बात हुई। मैक्रों ने कहा कि भारत और फ्रांस क्षेत्र में तनाव कम करने और शांति के लिए कूटनीति पर निकट सहयोग कर रहे हैं। अनवर ने इजरायल द्वारा ईरान पर बमबारी की निंदा की। ब्रिक्स में भी इस मुद्दे पर सहमति बनाने में चुनौतियां हैं। सरकार उर्वरक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए मोरक्को, ट्यूनिशिया आदि से स्रोत जुटा रही है।

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