नई दिल्ली में सोमवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर और विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने रूसी उप विदेश मंत्री आंद्रे रुडेंको से मुलाकात की। पश्चिम एशिया संकट के पृष्ठभूमि में दोनों पक्षों ने रणनीतिक साझेदारी बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। ऊर्जा आपूर्ति की कमी के बीच यह बैठक महत्वपूर्ण है।
नई दिल्ली में आयोजित भारत-रूस विदेश कार्यालय परामर्श में विदेश सचिव विक्रम मिस्री और आंद्रे रुडेंको ने सह-अध्यक्षता की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायस्वाल ने कहा, “दोनों पक्षों ने विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी के पूरे स्पेक्ट्रम की समीक्षा की और द्विपक्षीय, क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर दृष्टिकोण साझा किए।”
जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट किया, “रूस के उप विदेश मंत्री आंद्रे रुडेंको से मिलकर अच्छा लगा। हमारी व्यापक सहयोग की आगे बढ़ोतरी के बारे में बात की। साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक विकास पर।” हालांकि पोस्ट में ऊर्जा का जिक्र नहीं, लेकिन चर्चा का हिस्सा था।
यूएस-इजरायल-ईरान युद्ध के 30 दिन पूरे होने पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यवधान से भारत की तेल आयात प्रभावित हुई है। भारत अपनी 88 प्रतिशत कच्चे तेल की जरूरत आयात पर पूरा करता है, जिसमें से आधे से अधिक होर्मुज से गुजरते हैं। रूसी तेल आयात बढ़ाने से कमी पूरी हुई है।
रूसी एजेंसी टास के अनुसार, 27 मार्च को एलएनजी आपूर्ति बढ़ाने पर सहमति बनी, एलपीजी वितरण पर चर्चा हुई। रॉयटर्स ने बताया कि 19 मार्च को पावेल सोरोकिन और हरदीप सिंह पुरी के बीच एलएनजी सौदे पर मौखिक समझौता हुआ। ट्रंप ने पश्चिम एशिया युद्ध के बाद रूसी तेल आयात पर छूट दी।