पश्चिम एशिया में युद्ध छिड़ने के छह सप्ताह बाद अपनी पहली खाड़ी यात्रा पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को अबू धाबी में यूएई के डिप्टी प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायेद अल नाहयान से मुलाकात की। दोनों ने क्षेत्रीय स्थिति के विकास और उसके प्रभावों पर बात की। जयशंकर ने भारतीय समुदाय की भलाई सुनिश्चित करने के लिए यूएई का आभार व्यक्त किया।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार शाम अबू धाबी में यूएई के डिप्टी प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायेद अल नाहयान से भेंट की। जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट किया, "अबू धाबी में इस शाम यूएई के डीपीएम एवं एफएम @ABZayed से मिलना वास्तव में आनंदप्रद रहा। हमारी बातचीत विकसित हो रही क्षेत्रीय स्थिति और उसके प्रभावों पर केंद्रित रही।"
उन्होंने भारतीय समुदाय की भलाई सुनिश्चित करने के लिए गहरी कृतज्ञता व्यक्त की तथा व्यापक रणनीतिक साझेदारी के आगे बढ़ने के प्रति आश्वस्ति जताई। यात्रा की शुरुआत में जयशंकर ने भारतीय समुदाय के सदस्यों से मुलाकात की, जहां उन्होंने पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच उनकी सुरक्षा और कल्याण के लिए भारत सरकार के प्रयासों पर चर्चा की। उन्होंने समुदाय के स्थानीय योगदान और यूएई सरकार के समर्थन की सराहना की।
यह दो दिवसीय यात्रा अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में चल रही वार्ताओं के समय महत्वपूर्ण है। पश्चिम एशिया युद्ध के कारण ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण ने वैश्विक तेल कीमतों को ऊंचा कर दिया है, जो वैश्विक तेल और एलएनजी का 20 प्रतिशत ले जाता है।
इसके अलावा, जयशंकर ने घोषणा की कि क्षेत्रीय तनावों के बीच ईरान में फंसे 312 भारतीय मछुआरों को आर्मेनिया के रास्ते सुरक्षित वापस लाया गया। उन्होंने आर्मेनिया के समकक्ष अरारात मिर्जोयान का धन्यवाद दिया। एक सप्ताह पहले 345 मछुआरों को निकाला गया था।