3 दिसंबर 2025 को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पहली बार 90 के स्तर को तोड़ते हुए रिकॉर्ड निचले स्तर 90.14-90.16 तक गिर गया। अमेरिका-भारत व्यापार सौदे में अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की बिकवाली मुख्य कारण रहे। इससे महंगाई बढ़ने का जोखिम बढ़ गया है।
भारतीय मुद्रा रुपया 3 दिसंबर 2025 को सुबह खुलते ही गिरावट का शिकार हो गया और डॉलर के मुकाबले 89.96-89.97 के स्तर से लुढ़ककर 90.14-90.16 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। पिछली बंद 89.96-89.97 थी, जो मंगलवार को 43 पैसे की गिरावट के साथ आई थी। फॉरेक्स डीलरों के अनुसार, आयातकों की ओर से डॉलर खरीदारी, अमेरिका-भारत व्यापार सौदे में देरी और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली ने दबाव बनाया।
2025 में अब तक रुपया करीब 4.4-5% कमजोर हो चुका है। FPI ने इस साल शेयरों में 1.48 लाख करोड़ रुपये की बिक्री की है, जिसमें दिसंबर के पहले दो दिनों में 4,335 करोड़ रुपये शामिल हैं। मंगलवार को FII ने 3,642.30 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। एक निजी बैंक डीलर ने कहा, "हर कोई 90 की बात कर रहा था, लेकिन उम्मीद नहीं थी कि यह इतनी आसानी से हो जाएगा। कोई नहीं बता सकता कि आगे कहां जाएंगे।"
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने गिरावट को नियंत्रित करने के लिए डॉलर बेचे, लेकिन हस्तक्षेप सीमित रहा। कोटक सिक्योरिटीज के अनिंद्य बनर्जी ने कहा, "इंडो-यूएस व्यापार सौदे पर अनिश्चितता भावनाओं को कमजोर कर रही है। FPI बहिर्वाह और येन कैरी ट्रेड का अनवाइंडिंग दबाव डाल रहा है।" बैंक ऑफ बड़ौदा के मदन सबनविस ने कहा कि यह निर्यातकों को मदद देगा लेकिन आयातकों और महंगाई के लिए बुरा है।
गिरावट से हेजिंग लागत बढ़ी, एक साल का फॉरवर्ड प्रीमियम 7 आधार अंकों ऊपर गया। भारत-अमेरिका 10-वर्षीय यील्ड स्प्रेड 250 आधार अंकों तक पहुंचा। कच्चे तेल के आयात (80% जरूरत आयातित) पर असर पड़ेगा, जिससे पेट्रोल-डीजल महंगे होंगे और परिवहन लागत बढ़ेगी। RBI की मौद्रिक नीति 5 दिसंबर को घोषित होगी, जो स्थिरता पर स्पष्टता दे सकती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि रुपया 91 तक जा सकता है, लेकिन नीति के बाद 88-89 पर सुधार संभव है। डॉलर इंडेक्स 99.22 पर 0.13% नीचे और ब्रेंट क्रूड 62.43 डॉलर प्रति बैरल पर स्थिर रहा।