बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 5 मार्च 2026 को राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की घोषणा की, जिससे उनका सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। बीजेपी अब पहली बार बिहार का मुख्यमंत्री नियुक्त करेगी, जबकि जेडीयू समर्थक इसका विरोध कर रहे हैं। विपक्ष ने इसे जनादेश का विश्वासघात बताया है।
पटना, 5 मार्च 2026: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि वे राज्यसभा सदस्य बनने की अपनी लंबे समय से चली आ रही इच्छा को पूरा करने के लिए नामांकन दाखिल करेंगे। उन्होंने कहा, 'मेरी संसदीय यात्रा की शुरुआत से ही बिहार विधानमंडल और संसद दोनों सदनों का सदस्य बनने की इच्छा रही है। इस आकांक्षा के अनुरूप, मैं इस बार हो रहे चुनाव में राज्यसभा सदस्य बनने का प्रयास कर रहा हूं।' नीतीश ने आश्वासन दिया कि नई सरकार उनके पूर्ण सहयोग और मार्गदर्शन से बनेगी।
नीतीश का यह फैसला 2025 विधानसभा चुनाव के मात्र चार महीने बाद आया है, जहां एनडीए ने जीत हासिल की थी। बीजेपी ने अपनी सीटें जेडीयू से अधिक जीतीं, फिर भी नीतीश मुख्यमंत्री बने रहे। अब बीजेपी बिहार में पहली बार मुख्यमंत्री पद संभालेगी। संभावित उम्मीदवारों में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (ओबीसी कुशवाहा), केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय (ओबीसी यादव), मंत्री दिलीप जायसवाल (ईबीसी वैश्य) और विधायक संजीव चौरसिया (ओबीसी तमोली) के नाम चर्चा में हैं। सम्राट चौधरी को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
इस बीच, जेडीयू समर्थकों ने पटना में पार्टी कार्यालय पर तोड़फोड़ की और मुख्यमंत्री आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। वे संजय झा और ललन सिंह पर 'विश्वासघात' का आरोप लगा रहे हैं, जिन्हें बीजेपी के इशारे पर काम करने वाला बताया। एक समर्थक ने कहा, 'नीतीश कुमार ने सुषासन का मॉडल बनाया, इसे कैसे हटाया जा सकता है?' विपक्षी नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि बीजेपी ने सहयोगी को निगल लिया और नया मुख्यमंत्री 'रबर स्टैंप' होगा। सीपीआई(एमएल) के दीपंकर भट्टाचार्य ने इसे जनादेश का विश्वासघात कहा। कांग्रेस के जयराम रमेश ने 'लीडरशिप कूप' का आरोप लगाया।
नीतीश की राजनीतिक यात्रा 1974 की आपातकाल विरोधी आंदोलन से शुरू हुई। वे 1985 में पहली बार विधायक बने और 10 बार मुख्यमंत्री पद संभाल चुके हैं। उनके कार्यकाल में सड़कें, कानून-व्यवस्था, लड़कियों के लिए साइकिल योजना और महिलाओं के लिए 35% आरक्षण जैसी योजनाएं लागू हुईं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पटना पहुंचे, जहां बीजेपी अध्यक्ष नितिन नाबिन भी नामांकन दाखिल करेंगे। जेडीयू के कार्यकर्ता नीतीश के बेटे निशांत कुमार को डिप्टी सीएम बनाने की अटकलों पर चुप हैं। यह बिहार राजनीति में एक युग का अंत माना जा रहा है।