पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरदासपुर जिले में 19 वर्षीय रणजीत सिंह की पुलिस मुठभेड़ में मौत के मामले में स्वत: संज्ञान लिया है। अदालत ने पंजाब के डीजीपी गौरव यादव को गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने का निर्देश दिया है। रणजीत के परिवार ने आरोप लगाया है कि उन्हें 24 फरवरी को घर से उठाया गया और हिरासत में मार दिया गया।
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल और दीपक मंचंदा शामिल हैं, ने गुरदासपुर एनकाउंटर मामले में हस्तक्षेप किया है। अदालत ने डीजीपी को 2 बजे पेश होकर घटनाओं के क्रम पर विस्तृत जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। यह मामला गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जेल इंटरव्यू से जुड़े एक असंबंधित मामले के साथ सुना जाएगा।
22 फरवरी को अधियां गांव के संयुक्त चेकपोस्ट पर सहायक उप-निरीक्षक गुरनाम सिंह और होम गार्ड जवान अशोक कुमार की दोहरी हत्या हुई थी, जो पाकिस्तान सीमा से मात्र 2 किमी दूर है। पुलिस ने हमले को आईएसआई द्वारा प्रायोजित बताया, जिसमें तीन युवकों को लगभग 20,000 रुपये देकर अंजाम दिया गया। दिलावर सिंह को तुरंत गिरफ्तार किया गया, इंदरजीत सिंह को अमृतसर से पकड़ा गया, जबकि रणजीत सिंह को 25 फरवरी को एनकाउंटर में मार गिराया गया।
पुलिस के अनुसार, रणजीत को 24 फरवरी को हिरासत में लिया गया था और हत्या के हथियार की बरामदगी के लिए पुरणाशाला के पास ले जाया गया। वहां उन्होंने भागने की कोशिश की, एस्कॉर्ट पार्टी पर गोली चलाई और एक वरिष्ठ अधिकारी को घायल किया, जिसके जवाब में उन्हें गोली मार दी गई।
परिवार ने इस संस्करण को खारिज करते हुए कहा कि रणजीत को केवल पूछताछ के लिए उठाया गया था और हिरासत में ही उनकी हत्या कर दी गई। उन्होंने एनकाउंटर को स्टेज्ड बताया, सीसीटीवी कैमरों के हटाए जाने का जिक्र किया और पोस्टमॉर्टम तथा स्वतंत्र जांच की मांग की। गुरुवार दोपहर तक शव अंतिम संस्कार के लिए नहीं सौंपा गया था।
गुरदासपुर मजिस्ट्रेट ने कॉल रिकॉर्ड, जीपीएस डेटा, एनकाउंटर साइट की फुटेज संरक्षित करने के आदेश दिए हैं और अधिकारी की चोट के स्व-प्रेरित होने की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड गठित किया है। यह हाल के हफ्तों में हाईकोर्ट का दूसरा स्वत: संज्ञान है; पहला मोहाली में राणा बलचौरिया हत्याकांड से जुड़ा था।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने एनकाउंटर को वास्तविक बताया है। विपक्षी दलों ने सीबीआई जांच की मांग की है और राज्य पुलिस की कथित उच्च-हस्तक्षेप को उदाहरण बताया है।