श्रीलंका के मुख्य न्यायाधीश पद्मन सुरसेना ने संदिग्ध की स्वतंत्रता के सिद्धांत को भारत और श्रीलंका की न्यायपालिकाओं को जोड़ने वाला बताया है। उन्होंने अदालतों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका, मध्यस्थता के लाभों और क्षेत्रीय न्यायिक संवाद की आवश्यकता पर चर्चा की। यह बयान न्याय तक पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से आया है।
हाल ही में एक बयान में, श्रीलंका के मुख्य न्यायाधीश पद्मन सुरसेना ने भारत और श्रीलंका की न्यायिक प्रणालियों के बीच समानताओं पर जोर दिया, विशेष रूप से संदिग्ध की स्वतंत्रता के सिद्धांत के माध्यम से। यह सिद्धांत जांच के अधीन व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा करता है और दोनों देशों के कानूनी ढांचों में समानता दर्शाता है।
सुरसेना ने न्यायिक प्रक्रियाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के एकीकरण पर चर्चा की, जिसमें इसकी दक्षता बढ़ाने और न्याय तक पहुंच सुधारने की क्षमता पर प्रकाश डाला। उन्होंने मध्यस्थता को विवाद समाधान के प्रभावी वैकल्पिक तरीके के रूप में सराहा।
इसके अलावा, मुख्य न्यायाधीश ने क्षेत्रीय देशों के बीच मजबूत न्यायिक जुड़ाव की वकालत की ताकि बेहतर समझ और सहयोग को बढ़ावा मिले। यह पहल न्याय, अदालतों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में साझा चुनौतियों का समाधान करने के लिए महत्वपूर्ण है। सुरसेना के विचार भारत-श्रीलंका न्यायिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक कदम हैं।