उन्नाव रेप मामले में दोषी पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की आजीवन कारावास की सजा को निलंबित करने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की है। एजेंसी ने हाईकोर्ट के फैसले को कानून के विपरीत बताते हुए पीड़िता की सुरक्षा पर खतरे का हवाला दिया है। यह मामला 23 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट के फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है।
उन्नाव रेप कांड में पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिसंबर 2019 में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने आजीवन कारावास और 25 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। सेंगर ने जनवरी 2020 में इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी और मार्च 2022 में सजा निलंबन की याचिका दाखिल की। 23 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट ने सजा निलंबित कर जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया, लेकिन सेंगर अभी जेल में हैं क्योंकि पीड़िता के पिता की हत्या के एक अन्य सीबीआई मामले में उन्हें 10 साल की सजा हो चुकी है।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 27 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल की। याचिका में सीबीआई ने कहा कि हाईकोर्ट ने पीओसीएसओ एक्ट की मंशा को नजरअंदाज किया और सेंगर जैसे सिटिंग विधायक के प्रभाव को कम आंका, जो पीड़िता और परिवार की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकता है। एजेंसी ने तर्क दिया कि सजा निलंबन कानून के खिलाफ है, क्योंकि दोष सिद्धि के बाद जेल ही सामान्य नियम है।
सीबीआई की याचिका के अनुसार, सेंगर एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं जिनके पास पैसे और बाहुबल की ताकत है। पीओसीएसओ एक्ट का उद्देश्य न केवल सजा देना बल्कि बच्चों को यौन शोषण से सुरक्षा प्रदान करना भी है। दो महिला वकीलों ने भी पहले ही इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। दिल्ली में इस फैसले पर आक्रोश और विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।