अमेरिका में 'रूस पर प्रतिबंध लगाने का अधिनियम 2025' नामक बिल अगले हफ्ते सीनेट में पेश होगा, जो रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों जैसे भारत पर 500% तक टैरिफ लगा सकता है। यह बिल रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए आर्थिक दबाव बढ़ाने का प्रयास है। भारत, जो रूस से सस्ता कच्चा तेल आयात कर रहा है, इससे प्रभावित हो सकता है।
वाशिंगटन, 08 जनवरी 2026। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम और रिचर्ड ब्लूमेंथल ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बैठक के बाद 'रूस पर प्रतिबंध लगाने का अधिनियम 2025' नामक द्विदलीय बिल तैयार किया है, जिसे व्हाइट हाउस की मंजूरी मिल चुकी है। यह बिल रूस के यूक्रेन पर हमले के जवाब में रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था को कमजोर करने के उद्देश्य से है।
बिल के प्रावधानों के अनुसार, यदि रूस शांति वार्ता में सहयोग नहीं करता या समझौते का उल्लंघन करता है, तो अमेरिका रूस से तेल, गैस, यूरेनियम या अन्य ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले देशों के अमेरिकी आयात पर 500% तक टैरिफ लगा सकता है। सीनेटर ग्राहम का मानना है कि इससे रूस को बड़ा झटका लगेगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने भी संकेत दिया था कि भारत जैसे देश रूस से तेल खरीदना जारी रखते हैं तो टैरिफ बढ़ाए जा सकते हैं।
भारत के संदर्भ में, यूक्रेन युद्ध के बाद से भारत रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदकर अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी कर रहा है। इस बिल से भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ेगी। विश्लेषकों का कहना है कि यह रूस को कमजोर करेगा लेकिन मित्र देशों के बीच तनाव पैदा कर सकता है।
हालांकि, हालिया व्यापार डेटा से पता चलता है कि भारत अमेरिकी टैरिफ के बावजूद निर्यात में लचीलापन दिखा रहा है। सितंबर-नवंबर 2025 में टेलीकॉम निर्यात (खासकर स्मार्टफोन) में 237% की वृद्धि हुई, जबकि रत्न-आभूषण में 78.5% की गिरावट आई। समुद्री उत्पादों के निर्यात में कुल 17% वृद्धि हुई, जिसमें यूरोप और चीन को बिक्री बढ़ी। सीईएआई के के. आनंद कुमार ने कहा, "ईयू और चीन को शिपमेंट बढ़े हैं। केंद्र से अन्य देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते की मांग है।" कॉटन टेक्सटाइल्स काउंसिल के सिद्धार्थ राजगोपाल ने कहा, "90 रुपये की रुपया नई बाजारों में निर्यात को बढ़ावा दे रही है।"