उत्तर प्रदेश सरकार संभल जिले को धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है, जहां हिंदू मान्यताओं के अनुसार कल्कि का जन्म होगा। 52 किलोमीटर लंबे वंशगोपाल 24 कोसी परिक्रमा मार्ग का 300 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्विकास किया जाएगा। इसमें 87 तीर्थ स्थलों की बहाली और बुनियादी ढांचे का विकास शामिल है।
उत्तर प्रदेश सरकार संभल को अयोध्या और वाराणसी के साथ जोड़ते हुए धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर एक नया गंतव्य बनाने की दिशा में कदम उठा रही है। सूत्रों के अनुसार, 52 किलोमीटर लंबे परिक्रमा मार्ग का पुनर्विकास 300 करोड़ रुपये की स्वीकृत राशि से किया जाएगा, जिसमें सात मीटर चौड़ी सड़क और तीन मीटर ऊंचा पैदल पथ शामिल होगा।
संभल के जिलाधिकारी राजेंद्र पेंसिया ने कहा, “परिक्रमा करीब 50 वर्ष बाद पुनर्जीवित हो रही है, जो 1972 के बाद रुकी हुई थी। मार्ग के अतिक्रमण वाले हिस्सों को चार-पांच माह में साफ किया गया है। अब इसे विकसित कर चौड़ा किया जाएगा, जिसमें पैदल परिक्रमा करने वालों के लिए तीन मीटर ऊंचा फुटपाथ बनेगा।” उन्होंने बताया कि 87 पहचाने गए तीर्थ स्थलों में से अधिकांश, जैसे कल्कि, भुवनेश्वरी, चंद्रेश्वर और नैमिषारण्य, इसी मार्ग पर हैं।
एक दृष्टि दस्तावेज तीन चरणों का प्रस्ताव करता है। पहले चरण में परिक्रमा मार्ग, मंदिरों, घाटों और कुंडों का संरक्षण; दूसरे में सड़कें, स्वच्छता, पार्किंग और यात्री सुविधाएं; तीसरे में 84-87 स्थलों की बहाली और कल्कि संग्रहालय। लागत में 155 करोड़ सिविल कार्यों, 130 करोड़ 58 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण, 13.5 करोड़ उपयोगिता और वन कार्य, तथा 36 करोड़ सुविधाओं के लिए है।
पर्यटन, संस्कृति एवं धार्मिक कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने कहा, “24 कोसी परिक्रमा पर सालाना 6-7 लाख श्रद्धालु आते हैं। हम 68 तीर्थ स्थलों, 19 महाकूपों और पांच प्रमुख तीर्थों की बहाली पर ध्यान देंगे, साथ ही विरासत सड़कें और यात्री सुविधाएं विकसित करेंगे।” यह परियोजना संभल को मथुरा-वृंदावन से जोड़ेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगी।