चार धाम यात्रा 19 अप्रैल से शुरू होने के पहले उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को बुनियादी ढांचे और पशु कल्याण संबंधी एसओपी में संशोधन करने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की पीठ ने पशु क्रूरता रोकने और यात्रियों की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया। कोर्ट ने एक समिति को भी प्रगति की निगरानी के लिए बैठक बुलाने को कहा।
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 8 अप्रैल को एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य को चार धाम यात्रा के लिए एसओपी में संशोधन करने का आदेश दिया। गौरी मौलेखी की याचिका सहित कई मामलों में पीठ ने पाया कि यात्रा की तैयारी में देरी हो रही है। कोर्ट ने कहा, "यात्रा शीघ्र शुरू होने वाली है, इसलिए एसओपी में संशोधन तीन सप्ताह में हो।"
कोर्ट ने मार्च 16 को गठित 18 सदस्यीय समिति की समीक्षा की, जो पशु क्रूरता रोकने और लॉजिस्टिक प्रबंधन के लिए बनी थी। मार्च 24 की बैठक के फैसलों को लागू करने और अनसुलझे मुद्दों पर निर्णय लेने के लिए समिति अध्यक्ष को तीन सप्ताह में बैठक बुलाने को कहा गया। राज्य को अनुपालन पर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया।
रुद्रप्रयाग जिले के कोटमा में पशु चिकित्सा केंद्र के निर्माण में देरी पर कोर्ट ने चिंता जताई। राज्य ने 5.22 करोड़ रुपये के संशोधित प्रस्ताव का उल्लेख किया, लेकिन याचिकाकर्ता ने स्कॉटलैंड के कंसोर्टियम ऑफ आर्किटेक्ट्स फॉर एनिमल वेलफेयर के कम लागत वाले डिजाइन का सुझाव दिया। कोर्ट ने इसे विचार करने और अंतिम निर्णय तीन सप्ताह में लेने को कहा।
चार धाम यात्रा में यमनोत्री और गंगोत्री 19 अप्रैल, केदारनाथ 22 अप्रैल तथा बद्रीनाथ 23-24 अप्रैल को खुलेंगे। 2025 में 51 लाख से अधिक यात्री आए थे, जिससे बुनियादी सुविधाओं पर दबाव बढ़ा। कोर्ट ने यात्रियों और पशुओं की सुरक्षा पर जोर दिया।