मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने धार में बोझशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद विवाद से जुड़े मामलों की नियमित सुनवाई 6 अप्रैल से शुरू करने की घोषणा की है। यह फैसला सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद आया है, जिसने मुस्लिम पक्ष की याचिका पर हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
इंदौर खंडपीठ के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और अलोक अवस्थी ने 2 अप्रैल को यह आदेश जारी किया। सर्वोच्च न्यायालय ने मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी की अपील पर कहा कि हाईकोर्ट को पुरातत्व सर्वेक्षण ऑफ इंडिया (एएसआई) की वैज्ञानिक सर्वेक्षण रिपोर्ट, वीडियोग्राफी और फोटो से उत्पन्न आपत्तियों पर विचार करना चाहिए।
कोर्ट ने सभी पक्षों को 6 अप्रैल दोपहर 2:30 बजे से सुनवाई के लिए तारीख दी है। यह 22 जनवरी 2026 और 11 मार्च 2024 के पूर्व आदेशों के अनुरूप है। वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने मुस्लिम पक्ष का प्रतिनिधित्व किया।
एएसआई की 2,200 पृष्ठों की रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा संरचना प्राचीन मंदिरों के अवशेषों पर बनी है, जो परमार काल (10वीं-11वीं शताब्दी ई.) के हैं। हिंदू पक्ष इससे संतुष्ट है, जबकि मुस्लिम पक्ष ने आपत्तियों के नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।
साइट एएसआई संरक्षित 11वीं शताब्दी का स्मारक है। 2003 के समझौते के तहत हिंदू मंगलवार को पूजा और मुस्लिम शुक्रवार को नमाज अदा करते हैं। कोर्ट ने जैन मंदिर और गुरुकुल के दावे वाली याचिका पर सरकारी पक्ष को दो सप्ताह का समय दिया।