भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद हुई हिंसा को उजागर करने वाली सनातनी संसद की याचिका पर विचार करने पर सहमति जताई है। याचिका में सेवानिवृत्त एससी जज की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय निगरानी समिति गठित करने की मांग की गई है। बेंच ने सीबीआई को याचिका में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया।
मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सनातनी संसद की ओर से दायर आवेदन पर सुनवाई करने को राजी हो गई। संगठन ने 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद हुई हिंसा का हवाला देते हुए राज्य में कानून-व्यवस्था की मशीनरी की निगरानी के लिए सेवानिवृत्त एससी जज की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति गठित करने की मांग की।
वरिष्ठ अधिवक्ता वी गिरिल ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की जांच समिति से प्राप्त डेटा का उल्लेख किया। 2 मई 2021 से 20 जून 2021 तक पश्चिम बंगाल डीजीपी से 1,934 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से केवल 1,168 एफआईआर दर्ज की गईं। 9,304 नामित आरोपियों में से मात्र 1,345 गिरफ्तार हुए, जो 2.88 प्रतिशत है। अधिकांश आरोपी अब जमानत पर हैं।
जांच समिति ने 311 स्थलों का दौरा किया, जहां 188 मामलों (60 प्रतिशत) में एफआईआर ही दर्ज नहीं हुई। 123 मामलों में जहां एफआईआर दर्ज हुई, उनमें 33 मामलों (27 प्रतिशत) में पुलिस ने हल्के धाराओं का इस्तेमाल कर पतला करने का सहारा लिया।
बेंच ने याद दिलाया कि इनमें से कुछ मामलों की जांच सीबीआई को सौंपी गई है और सनातनी संसद को केंद्रीय एजेंसी को याचिका में पक्षकार बनाने को कहा।