सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से पूछा कि यदि 2030-2031 में उनकी पार्टी केंद्र में सत्ता में आ जाए और विपक्षी दल का कोई मुख्यमंत्री केंद्रीय एजेंसी के छापे में बाधा डाले तो उनका कानूनी प्रतिक्रिया क्या होगी। यह सवाल प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जनवरी में बाधित छापे से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान आया। बेंच ने राज्य द्वारा केंद्रीय जांच में हस्तक्षेप पर चिंता जताई।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने 24 मार्च 2026 को पश्चिम बंगाल सरकार और ममता बनर्जी की दलीलों पर प्रतिक्रिया देते हुए यह सवाल किया। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने पूछा, “यदि स्थिति उलट जाए? 2030-2031 में आप केंद्र में सत्ता में आ जाती हैं, और उनके मुख्यमंत्री ऐसा कुछ करते हैं... आपकी प्रतिक्रिया, आपकी कानूनी प्रतिक्रिया क्या होगी?” यह सवाल वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बंदोपाध्याय से पूछा गया, जो कपिल सिब्बल के साथ बनर्जी का पक्ष रख रहे थे। बंदोपाध्याय ने जवाब दिया, “हमें कानून के अनुसार चलना होगा।” ईडी की याचिका जनवरी में आई-पैक के सह-संस्थापक प्रतीक जैन के आवास और कार्यालयों पर बाधित छापे से उपजी है। तृणमूल कांग्रेस, जो राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी है, चुनावी रणनीति के लिए आई-पैक से सलाह लेती है। ईडी का आरोप है कि बनर्जी ने छापे में घुसकर कागजी और डिजिटल साक्ष्य ले लिए। एजेंसी ने उन पर और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर सीबीआई जांच की मांग की है। कोर्ट ने नोट किया कि मामले में एक ईडी अधिकारी ने भी अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर की है। जस्टिस मिश्रा ने कहा, “क्या ईडी अधिकारी केवल इसलिए भारत के नागरिक नहीं रह जाते क्योंकि वे पद पर हैं? क्या उनके साथ कोई भी गलत किया जा सकता है और वे इस अदालत में अनुच्छेद 32 के तहत नहीं आ सकते?” पहले सुनवाई में कोर्ट ने पूछा था कि क्या ईडी अधिकारियों को बनर्जी के “घुसने” पर केवल “देखते रहना” चाहिए। राज्य की ओर से ए.एम. सिंहवी, श्याम दिवान और सिद्धार्थ लूथरा ने तर्क दिया कि ईडी न तो “बॉडी कॉर्पोरेट” है और न ही “कानूनी या प्राकृतिक व्यक्ति”, इसलिए अनुच्छेद 32 के तहत नहीं आ सकती। दिवान ने कहा कि ईडी केंद्र सरकार का विभाग है और पीएमएलए में मुकदमा चलाने का अधिकार नहीं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मुख्यमंत्री ने “सार्वजनिक हित” में चल रही वैध जांच में बाधा डाली। छापे ₹2,742 करोड़ के कोयला तस्करी मामले से जुड़े हैं।