सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार को 2015 से 2025 के बीच 1,270 करोड़ रुपये के सार्वजनिक ठेकों के पुरस्कार की प्रारंभिक जांच शुरू करने का निर्देश दिया। यह आदेश भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के आरोपों पर आधारित याचिका पर आया है।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने 6 अप्रैल 2026 को यह निर्देश जारी किया। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने वॉलंटरी अरुणाचल सेना और सेव मोन रीजन फेडरेशन की याचिका का निपटारा करते हुए सीबीआई को 16 सप्ताह में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।
याचिकाकर्ताओं ने जनवरी 2015 से दिसंबर 2025 तक पारदर्शी निविदा प्रक्रिया को दरकिनार कर ठेकों में भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद का आरोप लगाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रारंभिक जांच आरोपों की सत्यता जांचने के लिए है और यह मामले के गुण-दोष पर टिप्पणी नहीं है।
जांच विशेष रूप से पेमा खांडू, उनके भाई त्सेरिंग ताशी, सौतेली मां रिंचिन ड्रेमा और संबंधित व्यक्तियों/फर्मों को दिए गए ठेकों पर केंद्रित होगी। इसमें खरीद प्रक्रिया, खुली निविदा न करने के कारण, वैधानिक अनुपालन, रिकॉर्ड, धन प्रवाह आदि शामिल हैं। कोर्ट ने 2015-2025 के बाहर भी संबंधित लेन-देन की जांच की अनुमति दी यदि आवश्यक हो।
अरुणाचल प्रदेश सरकार को पूर्ण सहयोग करने, चार सप्ताह में सभी रिकॉर्ड उपलब्ध कराने और नोडल अधिकारी नियुक्त करने का आदेश दिया गया। राज्य के मुख्य सचिव को एक सप्ताह में नोडल अधिकारी नामित करने को कहा गया है। सीबीआई को दो सप्ताह में जांच शुरू करनी होगी।