बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अदानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के खिलाफ सौर ऊर्जा अनुबंधों में रिश्वत के आरोपों पर सीबीआई जांच की मांग करने वाली याचिका खारिज कर दी। याचिकाकर्ता ने अमेरिकी अदालती कार्यवाहियों पर भरोसा किया था, लेकिन अदालत ने उनकी सद्भावना साबित न करने और वैधता की कमी का हवाला दिया।
बॉम्बे हाईकोर्ट की एक डिवीजन बेंच, जिसमें चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस सुमन श्याम शामिल थे, ने सिलवासा के 61 वर्षीय जितेंद्र मारू की याचिका खारिज कर दी। मारू ने प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत सीबीआई से एफआईआर दर्ज करने और अमेरिकी जांच एजेंसियों द्वारा जब्त "ब्राइब नोट्स" तथा इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड प्राप्त करने की मांग की थी।
याचिका में दावा किया गया कि अदानी ग्रीन एनर्जी और दिल्ली आधारित एजुर ग्लोबल ने आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, ओडिशा, छत्तीसगढ़ तथा जम्मू-कश्मीर के राज्य विद्युत वितरण कंपनियों के अधिकारियों को 2,000 करोड़ रुपये की रिश्वत देने का समझौता किया था। यह रिश्वत ऊंची दरों पर अनुबंध सुनिश्चित करने और अधिक सौर ऊर्जा खरीदने के लिए दी जानी थी। ये विवरण कथित तौर पर अदानी ग्रीन के एक एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर द्वारा रखे गए रिकॉर्ड में थे, जिन्हें एफबीआई ने जब्त किया और न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में पेश किया गया।
अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता ने अपनी सद्भावना स्थापित करने में विफल रहा और उनके पास इस याचिका दायर करने का कोई लॉकस स्टैंडी नहीं है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि ऐसी याचिका किसी कॉर्पोरेट समूह की प्रतिष्ठा और व्यावसायिक संभावनाओं को नुकसान पहुंचा सकती है।
इसी याचिकाकर्ता ने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड पर भी सीबीआई जांच की मांग की थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि 2004 से 2013-14 के बीच आरआईएल ने ओएनजीसी के कृष्णा-गोदावरी बेसिन क्षेत्र से प्राकृतिक गैस गैरकानूनी रूप से निकाली। इस याचिका को भी खारिज कर दिया गया।