दिल्ली हाईकोर्ट ने एनडीटीवी के संस्थापक प्रणय रॉय और राधिका रॉय के खिलाफ 2021 में जारी लुक आउट सर्कुलर (LOC) रद्द कर दिया है, इसे असंगत और मनमाना बताते हुए। जस्टिस सचिन दत्ता ने कहा कि यात्रा का अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार का हिस्सा है। दंपति को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया गया है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को बीओआई द्वारा 2019 और उसके बाद जनवरी 2021 से प्रभावी लुक आउट सर्कुलर (LOC) रद्द कर दिए, जो सीबीआई के अनुरोध पर एनडीटीवी के पूर्व निदेशक और प्रचारक प्रणय रॉय तथा राधिका रॉय के खिलाफ जारी किए गए थे। जस्टिस सचिन दत्ता ने फैसले में कहा कि LOC का लंबे समय तक जारी रहना 'असंगत और मनमाना' है तथा विदेश यात्रा का अधिकार जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का अभिन्न अंग है। कोर्ट ने नोट किया कि रॉय दंपति को पांच वर्ष से अधिक समय से LOC का सामना करना पड़ा, जबकि उन्होंने जांच में कभी असहयोग नहीं किया, भागने का प्रयास नहीं किया और कोई चार्जशीट दाखिल नहीं हुई। पहली सीबीआई एफआईआर 2017 में दर्ज हुई थी, जिसका समापन रिपोर्ट 2025 में कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। दूसरी एफआईआर अगस्त 2019 में धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज की गई। सीबीआई के अनुसार, मई 2004 से मई 2010 के बीच एनडीटीवी लिमिटेड ने कर天堂ों सहित विभिन्न क्षेत्राधिकारों में लगभग 32 सहायक कंपनियां बनाईं, विदेश से धनराशि ट्रांसफर करने के उद्देश्य से। हालांकि, अब तक कोई चार्जशीट दाखिल नहीं हुई। कोर्ट ने दंपति को जांच एजेंसी के समक्ष पेश होने और पूर्ण सहयोग करने का उपक्रम देने का निर्देश दिया।