नोएडा पुलिस ने सोमवार को एक समर्पित औद्योगिक सेल गठित करने की घोषणा की, जो डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (औद्योगिक) रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में काम करेगी। यह कदम इस महीने की शुरुआत में मजदूरों के विरोध प्रदर्शनों के बाद उठाया गया है। साथ ही, अदालत ने तीन आरोपीयों को दो दिन की पुलिस हिरासत दी है।
नोएडा पुलिस ने सोमवार को घोषणा की कि एक समर्पित औद्योगिक सेल गठित की जाएगी, जो अस्थायी आधार पर कार्य करेगी। इसकी कमान डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (औद्योगिक) रैंक के अधिकारी को सौंपी जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, इस सेल में एक असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (उद्योग), तीन इंस्पेक्टर और 25 विभिन्न रैंकों के अधिकारी तैनात होंगे।
यह सेल उद्योगों, श्रमिक यूनियनों और मजदूरों के साथ सीधी संलग्नता सुनिश्चित करेगी, शिकायतों का निपटारा करेगी और राज्य तथा केंद्र के कानूनों का पालन कराएगी। तीनों कमिश्नरेट जोन में लगभग 15,000 पंजीकृत औद्योगिक इकाइयां हैं, जो दो लाख से अधिक कंपनियों और चार लाख मजदूरों को रोजगार देती हैं। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (कानून और व्यवस्था) और डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (मुख्यालय) द्वारा तीन दिनों में प्रस्ताव तैयार कर उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक को भेजा जाएगा।
यह घोषणा अप्रैल के प्रारंभ में मजदूरों द्वारा वेतन वृद्धि, कार्य घंटों और ओवरटाइम भत्ते जैसे मुद्दों पर आयोजित विरोध प्रदर्शनों के बाद आई है।
उसी दिन, गौतम बुद्ध नगर के एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट वीरेक अग्रवाल की अदालत ने 13 अप्रैल को विरोध के दौरान हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार आदित्य आनंद, हिमांशु ठाकुर और सत्यम वर्मा को दो दिन की पुलिस हिरासत दी। हिरासत 29 अप्रैल सुबह 9 बजे से 30 अप्रैल शाम 6 बजे तक होगी। पुलिस ने कहा कि आरोपीयों के खुलासे से सत्यम वर्मा का लैपटॉप, सीपीयू और अन्य की मोबाइल फोन बरामद हो सकते हैं।
रक्षा पक्ष ने दावा किया कि आदित्य को 19 अप्रैल को यातना दी गई, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया, कहा कि गिरफ्तारी के आधार बताए गए थे और पूर्व हिरासत स्वीकृत हो चुकी है। सोमवार को 15-20 आरोपीयों के जमानत आवेदन खारिज हो गए।