अलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक विवाहित दंपति के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द कर दी, जब महिला ने कहा कि उसका विवाह उसकी अपनी मर्जी से हुआ था। अदालत ने यूपी पुलिस को ऐसे मामलों में हस्तक्षेप न करने की हिदायत दी, कहा कि यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन है। अदालत ने दंपति की वैवाहिक जीवन की सुरक्षा का आदेश दिया।
अलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को स्वेच्छा से विवाह करने वाले वयस्क दंपतियों को परेशान न करने की कड़ी हिदायत दी है।
हाईकोर्ट ने एक मामले में दंपति के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया, जिसमें महिला ने स्पष्ट किया कि विवाह उसकी अपनी इच्छा से हुआ था। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस कार्रवाई व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन करती है।
यह फैसला धारा 87 बीएनएस से जुड़े मामले में आया है, जो वयस्क दंपतियों के अधिकारों और वैवाहिक पसंद को संरक्षित करने पर जोर देता है। इंडिया टुडे के अनुसार, अदालत ने दंपति की वैवाहिक जीवन की रक्षा के लिए सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया।
फैसले में संवैधानिक संस्कृति और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर बल दिया गया है, जो ऐसे हस्तक्षेपों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम है।