बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने फैसला सुनाया है कि केवल वैवाहिक कलह अबेटमेंट टू सुसाइड के आरोपों का आधार नहीं बन सकती। पिछले सप्ताह पारित आदेश में कोर्ट ने 2019 के अमरावती मामले को रद्द कर दिया, जिसमें प्रत्यक्ष उकसावे की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने पिछले सप्ताह एक आदेश में कहा कि वैवाहिक कलह घरेलू जीवन में आम है और केवल विवाद होने से पति-पत्नी में से किसी पर आत्महत्या का आरोप लगाना उचित नहीं।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपी द्वारा पीड़ित को जीवन समाप्त करने के लिए प्रत्यक्ष उकसावा या भड़कावा होना चाहिए। यह फैसला 2019 के अमरावती मामले से जुड़ा है, जिसमें आत्महत्या का केस रद्द कर दिया गया।
कीवर्ड्स में उल्लिखित मानस रिया (mens rea) और सुसाइड नोट पर कोर्ट ने अबेटमेंट के लिए आवश्यक तत्वों पर बल दिया। यह निर्णय घरेलू विवादों से जुड़े कानूनी मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम कर सकता है।